चीमा ने कहा कि इस स्थिति को बदलना वांछनीय नहीं है। इससे अल्पसंख्यक समुदायों के अलावा आदिवासी समाज जिनके अपने व्यक्तिगत कानून हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई विशेष व्यक्तिगत कानून भेदभावपूर्ण है तो उसमें संशोधन किया जा सकता है लेकिन पूरे देश के लिए एक यूसीसी बनाना उचित नहीं है।
शिअद नेता ने यह भी कहा कि 21वें विधि आयोग ने भी निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो व्यवहार्य है और न ही वांछनीय है। चीमा ने कहा कि राज्यसभा में इस पर एक निजी विधेयक पेश करने से पहले इस मामले पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था।
सत्तारूढ़ आप पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि आप और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में बदलाव का वादा किया था लेकिन वे अब खुले तौर पर एक ऐसे मुद्दे का समर्थन कर रहे हैं, जो समाज में कलह का कारण बनेगा।