सुखबीर सिंह बादल को बस में बैठते हुए।
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पंजाब में बीएसएफ का कार्यक्षेत्र 50 किलोमीटर किए जाने के विरोध में शिअद कार्यकर्ता गुरुवार को सड़क पर उतर आए। केंद्र के फैसले के विरोध में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में राजभवन के बाहर वर्करों ने धरना दिया। इस दौरान हुई धक्कामुक्की के बीच पुलिस ने सुखबीर सहित अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में सेक्टर-3 थाने से सभी को रिहा कर दिया गया। इस दौरान सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर केंद्र के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया और उनसे इस्तीफे की मांग की।
इससे पहले धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि केंद्र ने तीनों कृषि कानून लाकर राज्य के किसानों के साथ भेदभाव किया है। अब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार कर राज्य के आधे से अधिक क्षेत्र में कानून और व्यवस्था पर नियंत्रण कर लिया है। यह संघीय ढांचे पर केंद्र का हमला है।
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उन्होंने कहा कि अब श्री दरबार साहिब, दुर्ग्याणा मंदिर और राम तीर्थ जैसे हमारे पवित्र धार्मिक स्थल भी केंद्रीय बलों के नियंत्रण में आ जाएंगे। अकाली दल इस गलत फैसले के खिलाफ लड़ेगा, क्योंकि हम संघीय संरचना के लिए खड़े रहते हैं। यह निंदनीय है कि मुख्यमंत्री की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के दौरान यह सांठगांठ हुई है। चन्नी ने कुछ माह पद पर रहने के लिए राज्य के हितों को बेच दिया है।
उन्होंने पंजाबियों को आश्वासन देते हुए कहा कि राज्य में एक बार शिअद-बसपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद इसे रद्द कर दिया जाएगा। पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि नए केंद्रीय कदम ने लोगों को आतंकवाद के काले दिनों की याद दिला दी है, जब पूरे राज्य पर केंद्रीय बलों का बोलबाला था। उन्होंने कहा कि सुखजिंदर रंधावा ने जेल मंत्री के रूप में इसका समर्थन करते हुए कहा कि जेलों का नियंत्रण सीआरपीएफ को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि गृहमंत्री सुखजिंदर रंधावा का गांव भी केंद्रीय बलों के नियंत्रण में आ गया है। पार्टी अध्यक्ष के साथ-साथ वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा, सुरजीत सिंह रखड़ा, एनके शर्मा और परमबंस रोमाणा ने भी गिरफ्तारियां दी।