कृषि कानूनों के खिलाफ अकाली दल ने किया संसद मार्च।
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कृषि कानूनों को निरस्त करने और फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद सुनिश्चित करने की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को दिल्ली में बिना इजाजत संसद तक मार्च निकाला। इस दौरान पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किया।
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जबरन संसद की तरफ कूच करने पर दिल्ली पुलिस ने शिअद प्रधान सुखबीर बादल और सांसद हरसिमरत कौर समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान सुखबीर बादल ने कहा कि पार्टी तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए लगातार लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने पंजाबियों को यह भी आश्वासन दिया कि शिअद-बसपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद पंजाब में इस अधिनियम को लागू नहीं किया जाएगा। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बलविंदर सिंह भूंदड़ और हरसिमरत कौर बादल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने से रोकने की निंदा की।
उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं को तो 20 किलोमीटर तक चलना पड़ा। सुखबीर बादल ने कहा कि जहां तक अकाली दल का सवाल है यह एकमात्र विपक्षी दल था, जिसने संसद में तीनों कृषि विधेयकों का विरोध किया था। किसान नेताओं की अपील के बावजूद राजनीतिक दलों को संसद की कार्यवाही का बहिष्कार नहीं करना चाहिए था। कांग्रेस पार्टी और आप दोनों ने तीनों विधेयकों का विरोध करने के बजाय संसद से वॉकआउट करने का रास्ता चुना था।
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हम एकमात्र ऐसी पार्टी हैं, जिसने किसानों और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। हमने खेती के काम, पक्के पानी के चैनलों का निर्माण और किसानों को मुफ्त नहरी पानी के लिए मुफ्त बिजली देना सुनिश्चित किया था। - सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिअद
अगर एनडीए सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया तो वह न केवल पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विधानसभा हारेगी, बल्कि 2024 में लोकसभा चुनाव भी हार जाएगी। - हरसिमरत कौर बादल, सांसद, शिअद