एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि वीआईपी मेहमानों को कुछ ऐतिहासिक स्थानों पर छोड़कर किसी को भी सिरोपा नहीं दिया जाएगा। उनका मान सत्कार श्री दरबार साहिब के मैनेजर के कमरे या एसजीपीसी सूचना केंद्र में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जून से 6 जून तक हर सिख मानसिक पीड़ा में आ जाता है, क्योंकि साल 1984 में हुए घल्लूघारे के दौरान बहुत सिख शहीदी पा गए।
बहुत बच्चे, बीबीयां और बुजुर्गों को मौत के घाट उतारा गया। सिखों की यह रिवायत रही है कि सचखंड श्री दरबार साहिब में चाहे मुसलमानों या अंग्रेजों ने हमला किया तो सिखों ने उसका डटकर मुकाबला किया। धामी ने कहा कि एसजीपीसी की ओर से पिछले साल अमृतधारी बच्चों को स्कालरशिप के रूप में 63 लाख रुपये दिए गए।
उन्होंने कहा कि अब धार्मिक परीक्षाओं में अव्वल और सेकेंड आने पर 6 से 10 तक के अमृतधारी विद्यार्थियों को 3500, 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को 5 हजार, बीए वालों को 8 हजार रुपये तथा पोस्ट ग्रेजुएशन अमृतधारी विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये स्कालरशिप दी जाएगी। एसजीपीसी पंजाब से बाहर पढ़ने वाले अमृतधारी विद्यार्थियों की पूरी फीस देती है।
आंध्र प्रदेश में ऐसे 85 और छत्तीसगढ़ में 70 सिख विद्यार्थियों की फीस देती है। सिंह बंदियों के मुद्दे पर हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि राजीव गांधी के हत्यारे को पेरोल पर रिहा कर दिया गया है तो 32-33 वर्षों से नजरबंद सिंहों को रिहा किया जाना चाहिए। इसके लिए 11 सदस्यीय कमेटी बनाई, जिसने 20 मई को पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखे। इन पत्रों को प्राप्त कर लिए जाने की रसीद तो मिल गई लेकिन अभी तक कमेटी को उन्हें मिलने की तिथि नहीं मिली। एसजीपीसी प्रधान ने 6 जून को सभी संगत से एकजुट होकर इस दिवस को मनाने का आह्वान भी किया।