धामी ने कहा कि एसजीपीसी ने पूर्व में किए प्रयासों के क्रम में हस्ताक्षर अभियान को आगे बढ़ाया गया है और उम्मीद है कि इससे सरकारों के बंद कान खुलेंगे। आज एक ही समय में 25 गुरुद्वारा साहिबों से इसकी शुरुआत की गई है और अगले कुछ दिन में सिख मिशन के माध्यम से इसे अलग-अलग राज्यों में सक्रिय किया जाएगा। इस अभियान को देशव्यापी बनाने का निर्णय लिया गया था लेकिन संगत की भावना के अनुसार आज के डिजिटल माध्यम से इसकी पहुंच को वैश्विक बनाया जाएगा।
हस्ताक्षर अभियान के तहत भरे जाने वाले प्रोफॉर्मा हिंदी और अंग्रेजी में भी छपवाए जाएंगे ताकि पंजाब के बाहर के राज्यों के लोग हस्ताक्षर अभियान को बारीकी से समझ सकें और इसमें भाग ले सकें। इस हस्ताक्षर अभियान से विदेश के लोगों को जोड़ने के लिए एक विशेष ऑनलाइन गूगल फार्म तैयार किया गया है। इस फार्म को एसजीपीसी की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया जाएगा।
धामी ने जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक कमेटी की भी घोषणा की। कहा कि वैश्विक आंदोलन खड़ा करने के साथ ही कानूनी कार्यवाही में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस संबंध में वकीलों का चार सदस्यीय पैनल काम करेगा, जिसमें पूरन सिंह हुंदल, परमजीत सिंह, बलदेव सिंह ढिल्लों और भगवंत सिंह सियालका शामिल हैं।
इसमें अन्य प्रतिष्ठित वकीलों को शामिल करने का विकल्प होगा। उन्होंने मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले सभी संगठनों के साथ-साथ सिख पंथ संगठनों और समाजों और संगतों से जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए हस्ताक्षर अभियान का हिस्सा बनने की अपील की।