फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दर्द परदेसां देः मलेशिया में ऐसा होता है सिखों के साथ

Wed, 04 Mar 2015 12:42 PM IST
शिवानी मेहता/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
विदेशों में रहने वाले सिखों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं। अब मलयेशिया के तीन स्कूलों ने सिख छात्रों को अजीबोगरीब चेतावनी जारी की है।
विज्ञापन


इन स्कूलों ने छात्रों को दाढ़ी कटाने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा। मलयेशिया के शहर म्यूएर, वांगसा माजू और सेरेमबन स्थित इन स्कूलों की तरफ से यह चेतावनी जारी होने के बाद से यहां का सिख समुदाय सकते में है।


सिख संगठनों ने शिक्षा मंत्रालय से छात्रों को दाढ़ी रखने की अनुमति देने संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। मलयेशिया के नेशनल सिख यूथ आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष पवनदीप सिंह के अनुसार स्कूलों में अब भी सिख छात्रों को दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं दी जाती।
विज्ञापन

दिशा-निर्देश जारी, फिर भी शिकायतें आ रही

ऐसी शिकायत मिलने पर संगठन के कुछ पदाधिकारी स्कूलों में जाकर प्रिंसिपल व अन्य स्टाफ को सिख कौम के बारे में जानकारी देते हैं। उन्हें समझाया जाता है कि सिख धर्म केस कटाने की इजाजत नहीं देता। लेकिन देश के एक-एक स्कूल में जाकर जागरूक करना लगभग असंभव सा है।

ऐसे में शिक्षा मंत्रालय को सिख छात्रों के लिए आगे आना होगा। वहीं, मलयेशिया गुरुद्वारा काउंसिल (एमजीसी) के अध्यक्ष जगीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में एमजीसी ने प्रधानमंत्री से सिख छात्रों को पगड़ी, कड़ा पहनने और दाढ़ी रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

इस पर शिक्षा मंत्रालय की तरफ से दिशा-निर्देश तो जारी किए गए लेकिन इनमें दाढ़ी का जिक्र नहीं हुआ, जिसके चलते अब तक स्कूलों की ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
विज्ञापन

दाढ़ी और पगड़ी पर प्रतिबंध नहीं

मलयेशिया में सिखों के दाढ़ी रखने और पगड़ी पहनने पर प्रतिबंध नहीं है। करीब चार साल पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से देश के सभी विभागों में इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसलिए नौकरी में कभी भी सिखों को ऐसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

हमारे पास इस बारे में शिकायत पहुंची है। जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
डॉ. खैर मोहम्मद यूसुफ, शिक्षा महानिदेशक, मलयेशिया

ये बहुत गंभीर और निंदनीय मसला है। इसे एंबेसी के जरिए मलयेशिया सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। साथ ही भारत सरकार से भी अनुरोध करेंगे कि वह सिख छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।
डॉ.दलजीत सिंह चीमा,प्रवक्ता,शिरोमणि अकाली दल एवं, शिक्षा मंत्री, पंजाब
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें