उनके साथ जीआरपी और आरपीएफ के अधिकारी भी मौजूद रहे, जो सुरक्षा कर्मियों के बीच तालमेल और सीसीटीवी कैमरों से स्टेशन की गतिविधियों पर नजर बनाए थे। आपात स्थिति में बल प्रयोग और लाठीचार्ज करने के आदेश लेने में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी को भी यकीनी बनाया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों के 250 जवान रहे तैनात
लुधियाना स्टेशन पर 18 जून को हमले के बाद जीआरपी और आरपीएफ की खूब किरकिरी हुई। यही कारण है कि सोमवार को बंद की कॉल दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से जिला पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के हाथ में रही, जबकि जीआरपी और आरपीएफ ने सिर्फ स्टेशन के अंदरूनी सुरक्षा घेरे को संभाला। जिला पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने पूरी तैयारी और साजो सामान के साथ स्टेशन परिसर को चारों तरफ से घेरे रखा। इस दौरान करीब 250 पुलिस कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
17 जून को बनी थी योजना, 18 को कर दिया हमला, 18 युवक पकड़े
लुधियाना स्टेशन पर हमले की योजना 17 जून को बनी थी। अगले ही दिन आरोपी भारत नगर चौक में एकत्रित हुए और पीसीआर गाड़ी में तोड़फोड़ तथा सड़कों पर उपद्रव मचाने के बाद लुधियाना स्टेशन पर हमला कर दिया। पुलिस कमिश्नर डॉ. कौस्तुभ शर्मा के मुताबिक हमले से एक दिन पहले आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुपों में पुलिस और स्टेशन परिसर को टारगेट करने की योजना बनाई थी। यह खुलासा आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच दौरान हुआ। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जीआरपी के छह आरोपियों के अलावा जिला पुलिस ने 18 आरोपी पकड़े हैं।