सच्चा सौदे डेरे की जमीन में दफन राज सामने नहीं आए। कोर्ट कमिश्नर की देखरेख में शुक्रवार को शुरू हुआ तलाशी अभियान तीसरे दिन रविवार को खत्म हो गया। इसी के साथ डेरे में नर कंकाल होने के रहस्य से पर्दा भी नहीं उठ पाया। कहा जा रहा है कि सर्च टीम ने डेरे में जमीन की खुदाई में दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। हालांकि, इसकी आशंका तभी हो गई थी जब डीजीपी बीएस संधू ने कहा था कि नर कंकाल होने का यदि कोई व्यक्ति दावा कर रहा है तो उसे पुलिस में लिखित शिकायत करनी चाहिए। चूंकि लिखित शिकायत हुई नहीं तो नर कंकाल की तलाश भी नहीं की गई।
बता दें कि डेरे के पूर्व साधुओं ने दावा किया है कि सच्चा सौदा डेरे के परिसर में कई लोगों को मार कर दबा दिया गया है। कहा जाता है कि ये वे लोग हैं जिन्होंने सच्चा सौदे में जारी अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ आवाजें उठाईं और डेरा प्रमुख के इशारे पर इनकी आवाजों को सदा के लिए खामोश कर दिया गया। ऐसी घटनाओं का राज बाहर जाहिर न हो इसलिए लाशों को डेरा के बाग और खेतों में दफना दिया गया। इसलिए लोग चाहते थे कि सरकार डेरा में सर्च ऑपरेशन चलाकर इस राज से पर्दा उठाया जाए।
डेरा प्रमुख के जेल जाने के 15 दिनों बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर डेरे में कोर्ट कमिश्नर अनिल कुमार सिंह पवार की देखरेख में सर्व ऑपरेशन शुरू हुआ। सर्च आपरेशन से जहां कई आरोपों की पुष्टि हो रही है, वहीं सबसे बड़े रहस्य से पर्दा उठाना बाकी रह गया। जमीनों की खुदाई नहीं होने से नर कंकाल का मामला दबा ही रह गया। प्रशासन के प्रवक्ता सतीश मेहरा स्वीकार कर रहे हैं कि सर्च ऑपरेशन पूरा हो गया है, लेकिन डेरे की जमीनों की खुदाई नहीं की गई। जबकि डेरा सच्चा सौदा यह स्वीकार कर रहा है कि डेरे की जमीन में नर कंकाल हैं।
ये नर कंकाल उन डेरा प्रेमियों के हैं, जिनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी मौत के बाद उनका शव डेरे की जमीन में दफन दिया जाए, ताकि मोक्ष की प्राप्ति हो। डेरे के इस दावे की सचाई भी तभी सामने आएगी जब खुदाई करके नर कंकालों को बाहर निकालकर उनकी जांच की जाए। जांच से साफ हो जाएगा कि जिस शख्स का शरीर दफन किया गया उसकी मौत प्राकृतिक थी या हत्या हुई थी।
सबूत छुपाने और मिटाने के लिए मिले 14 दिन
Dera Sacha Sauda, Sirsa
सबूत छुपाने और मिटाने के लिए मिले 14 दिन
डेरे के अंदर होने वाली कथित संदिग्ध गतिविधियों के सबूत मिटाने और छुपाने के लिए प्रबंधकों को 14 दिन का लंबा समय मिला। अमर उजाला ने इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया था और सूत्रों के हवाले से 30 अगस्त के अंक में जानकारी दी थी कि किस तरह कर्फ्यू के बावजूद डेरे से कैश, हथियार और दस्तावेज कैंटर में भरकर राजस्थान भेजे गए हैं। अब दो दिन से जारी सर्च में भी इस बात के प्रमाण भी मिले हैं कि गर्ल्स होस्टल और अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानों से सबूत और दस्तावेज हटाये और जलाए गए हैं। 25 अगस्त को डेरामुखी को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था और 28 अगस्त को सजा भी सुना दी थी मगर डेरे की तलाशी का काम 8 सितंबर को शुरू हुआ।
सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार को सबूत चाहिए तो राजस्थान के गुरसर मोड़िया स्थित धाम की तलाशी होनी चाहिए। गुरसर मोड़िया राम रहीम का पैतृक गांव है। राम रहीम की गिरफ्तारी के बाद उनका पूरा परिवार सिरसा का डेरा छोड़कर इसी धाम में शिफ्ट हो गया बताया जाता है। सरकार ने परिवार को अपने साजो सामान के साथ सिफ्ट होने का पूरा मौका और सेफ रास्ता दिया। डेरामुखी छह माह पहले यहां शूटिंग के लिए भी आया था। यहां ़डेरे की ओर से स्कूल, कालेज और स्टेडियम भी बनावाया गया है।
डेरा प्रमुख की लग्जरी गाड़ियों का कलेक्शन गायब
बाबा गुरमीत राम रहीम
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम अपने आपको सर्वगुण संपन्न मानता था। वह अभिनेता, गायक, लेखक, निदेशक होने के साथ-साथ अपनी लग्जरी कारों की डिजाइनिंग खुद तैयार करके अपनी पसंद के हिसाब से मॉडीफाई करवाता था। डेरा प्रमुख के पास करीब 100 से ज्यादा लग्जरी कारों का कलेक्शन था, लेकिन डेरा सच्चा सौदा में सर्च ऑपरेशन के दौरान कारों का कलेक्शन नहीं मिला।
24 अगस्त से डेरा सच्चा सौदा के चारों तरफ कर्फ्यू लगा है और हर तरफ सुरक्षा बलों की घेराबंदी है। ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि डेरा से बाबा की लग्जरी कारों का कलेक्शन कैसे गायब हो गया? डेरा चीफ की फिल्मों में इन कारों को दिखाया जाता था। प्रशासन की ओर से अभी तक सर्च ऑपरेशन में कारों के कलेक्शन का जिक्र नहीं है। इससे जाहिर होता है कि डेरा प्रबंधन ने सर्च ऑपरेशन से पहले सबूत मिटाने के साथ बाबा की लग्जरी कारों के कलेक्शन को भी ठिकाने लगा दिया।