पोर्टल पर जानकारी अपलोड नहीं करने से शिक्षा निदेशक ने जताई नाराजगी, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी और निजी स्कूलों में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश पर स्कूल ही पलीता लगाने पर तुले हैं। दो माह पहले हरियाणा सरकार ने सभी स्कूलों से खेल सुविधाओं और खेल ढांचे को लेकर जानकारी मांगी थी। लेकिन अभी तक कई जिलों से रिपोर्ट नहीं आई। सबसे ज्यादा खराब स्थिति शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा के जिले फरीदाबाद की है। यहां के मात्र चार स्कूलों ने ही सुविधाओं का ब्योरा दिया है।
शिक्षा विभाग स्कूलों में चार बार से ज्यादा रिमाइंडर पत्र लिख चुका है। पहले 25 अप्रैल तक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सेकेंडरी शिक्षा निदेशक की ओर से 9 मई तक रिपोर्ट तलब की। अब जून में शिक्षा विभाग ने पत्र लिखकर स्कूलों से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी मांगी है। रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ से प्रगति रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है। हालांकि, खेल सुविधाओें की मैपिंग में सिरसा और झज्जर जिले की रिपोर्ट सराहनीय रही है। स्कूलों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाने पर सेकेंडरी निदेशक ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जल्दी से जल्दी स्पोर्ट्स इन्फ्रा पोर्टल पर खेल सुविधाओं को अपलोड करें।
शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेशभर में खेल सुविधाओं और संसाधनों का आकलन करने को लेकर जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम) मैपिंग की जानी है। मैपिंग के जरिये न केवल स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बल्कि उन स्कूलों की भी जानकारी आएगी, जिनमें खेल मैदान हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। वहीं, मैपिंग के जरिये विभाग को हर स्कूल के खर्च किए जाने वाले खेल बजट का भी खाका तैयार करने में आसानी होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा उन स्कूलों को मिलेगा, जहां पर परंपरागत खेलों की प्रतिभाएं हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनको नई पहचान नहीं मिल पा रही है।
ऐसे होगी जीआईएस मैपिंग
स्कूल मुखिया व शिक्षक द्वारा मोबाइल को वास्तविक स्कूल परिसर में रखकर मानचित्र एप्लीकेशन से जीआईएस स्थान अपलोड करना होगा। इसके बाद यह डाटा सैटेलाइट मैप के साथ अटैच होगा। बता दें कि ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) में सैटेलाइट के माध्यम से जमीनी आकृतियों, भू-भागों आदि को डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जाता है। लिहाजा शिक्षा विभाग स्कूलों में जाए बिना ही मुख्यालय पर ही आसानी से स्कूल परिसर में खेल मैदान, सुविधाओं और संसाधनों को सीधा कंप्यूटर पर देख सकेगा। इससे बाद विभाग की ओर से स्कूलों में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।