अनाज मंडियों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए शुरू की गई हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में दलालों ने सेंध लगाकर पीआर धान खरीद में करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। घोटाले में आढ़ती, मिलर्स, मार्केट कमेटी समेत खरीद एजेंसियों के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत का भी शक है। खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में यह खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता संदिग्ध मंडियों और राइस मिलों में स्टॉक और रिकॉर्ड की जांच करने में जुटा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दलालों ने दूसरों की जमीन को ठेके और बंटाई पर दिखाकर रिश्तेदारों व जानकारों के नाम पर फर्जी पंजीकरण कराया है। बकायदा मोबाइल नंबर, आधार संख्या व बैंक खाते दर्ज कराए गए। इसी आधार पर मार्केट कमेटी के अधिकारियों, मिलर्स और आढ़तियों से मिलीभगत से मंडी में फर्जी गेट पास काटे गए। मंडियों में बिना पीआर धान आए कागजों में ही धान की खरीद, उठान और मिलर्स को अलॉट कर दिया गया। करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र और पलवल जिले की मंडियों से सबसे ज्यादा शिकायतें आई हैं। करनाल, असंध, घरौंडा में ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं जिसमें पता लगा कि गेट पास और पंजीकरण फर्जी काटे गए हैं।
जिनके नाम काटे जा रहे गेट पास, उनका खेती से वास्ता ही नहीं
- जिन लोगों के नाम पोर्टल पर खेती करना दिखाया गया है उनका खेती से दूर तक वास्ता नहीं है। साथ ही जिनके नाम पर गेट पास काटे गए हैं उनको अपने पंजीकरण तक की जानकारी नहीं है और वह खुद मंडी में धान लाने से मना कर रहे हैं।
- किसानों के नाम पर 250 से 300 क्लिंटल तक के गेट पास काटे गए हैं। एक ट्रॉली में इतना धान आना किसी भी सूरत में संभव नहीं है। खुफिया विभाग ने ऐसे वाहनों और मंडियों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के लिए भी सुझाव दिया है, ताकि पूरे मामले का खुलासा हो सके।
-इस खेल में सभी के रेट तय किए गए हैं। पोर्टल पर जमीन ठेके पर दिखाने वाले को 100 रुपये क्विंटल, आढ़ती को 200 रुपये प्रति क्विंटल, मार्केट कमेटी गेट पास काटने के नाम पर 80 से 90 रुपये प्रति क्विंटल लिए जाते हैं। इसके अलावा, खरीद एजेंसी कें अधिकारियों के भी अलग-अलग रेट तय हैं। पूरा खर्च फर्जी खरीद करने वाला राइस मिलर्स उठाता है और सभी को हिस्सा पहचाया जाता है।
यहां है कमी
मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति किसी की जमीन को अपने या रिशतेदार के नाम पर बंटाई या ठेके पर दिखा सकता है। फर्जी पंजीकरण रोकने को कोई पुख्ता योजना नहीं है। दूसरा, नियमों के मुताबिक, अगर कोई किसान 15 एकड़ से अधिक फसल का पंजीकरण कराता है तो उसकी भौतिकी जांच पटवारियों को करनी होती है, लेकिन ऐसा जमीनी स्तर पर नहीं हो पाता है।
सरकार को चूना...
सरकार केवल पीआर धान की खरीद एमएसपी 2060 रुपये प्रति क्विंटल पर करती है। बासमती धान को मिलर्स या एक्सपोटर खरीदते हैं। इसलिए पहले पोर्टल पर फर्जी नाम से पंजीकरण कराया गया। मंडी में धान का गेट पास काटा गया और कागजों में आवक व खरीद दिखाई गई। धान खरीद के 72 घंटे बाद सरकार पंजीकरण के समय दिए गए बैंक खाते में राशि डाल देती है। इसके अलावा सरकार धान मिलिंग के लिए मिलर्स अलग मिलिंग चार्ज देती है। इसी का फायदा मिलर्स उठाते हैं। वे 1400 रुपये प्रति क्विंटल पीडीएस का चावल दूसरे राज्यों से खरीदते हैं और एफसीआई को डिलिवर कर देते हैं। इससे मिलर्स को फायदा है कि न तो उसे मिल चलाना पड़ा और न ही धान की कुटाई करनी पड़ी है। इसके अलावा, मिलर्स को सरकार की ओर से मिलर्स को मिलिंग चार्ज और आढ़ती को ढाई प्रतिशत तक आढ़त दी जाती है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के रडार पर गड़बड़ी वाले
रिपोर्ट के बाद फर्जी खरीद करने वाले लोग सीएम प्लाइंग के रडार पर आ गए हैं। संदिग्ध मंडियों और राइस मिलों में स्टॉक और रिकार्ड की जांच की जा रही है। असंध, जुंडला और पलवल में करोड़ों रुपये की फर्जी खरीद का खुलासा हो चुका है। अभी कई स्थानों पर जांच होनी शेष है। खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि फर्जी धान खरीद को लेकर सरकार गंभीर है और ऐसे लोग सीएम फ्लाइंग के रडार पर हैं। भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।