कोठी प्रकरण मामले में सलाखों के पीछे पहुंचे संजीव महाजन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी प्रोडक्शन वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने महाजन को बिना कोई राहत दिए ट्रायल कोर्ट को एक माह में गवाहों को जांचने का आदेश दिया है।
अपनी याचिका में महाजन ने बताया कि एक मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद गवाहों और शिकायतकर्ता को अपने अनुसार पुलिस याची के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है। उसकी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई से ठीक पहले एक कहानी गढ़ी गई। याची ने कहा कि उसने शिकायतकर्ता को फोन नहीं किया था और न ही धमकाया था। कुछ अफसर प्रतिशोध की भावना के चलते यह नहीं चाहते हैं कि याचिकाकर्ता सलाखों के बाहर आए। इसीलिए फोन पर धमकी की बात कहते हुए एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
याची ने कहा कि यदि पुलिस की बात मान भी ली जाए तो चंडीगढ़ पुलिस ने 23 नवंबर को जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, पुलिस की कहानी के अनुरूप उन धाराओं में अपराध बनता ही नहीं है। साथ ही ट्रायल कोर्ट ने 7 दिसंबर के लिए प्रोडक्शन वारंट का जो आदेश दिया है, उसको देखते हुए कानून के प्रावधानों का ध्यान नहीं रखा है।
एक कैदी को प्रोडक्शन वारंट केवल पूछताछ के लिए दिया जाता है न कि पुलिस को उसकी हिरासत दी जाती है। कैदी को प्रोडक्शन वारंट पर पुलिस को हिरासत में दिया जा सकता है या नहीं यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि उसके प्रोडक्शन वारंट को खारिज किया जाए।