करीब 100 दिन पहले आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पंजाब में सरकार बनाई थी। आप बदलाव के नारे के साथ पंजाब की सत्ता पर काबिज हुई थी, लेकिन संगरूर उपचुनाव के रूप में मिली पहली राजनीतिक चुनौती में ही हार गई।
आप सरकार के छोटे से कार्यकाल में पंजाब में कानून व्यवस्था बुरी तरह ध्वस्त हुई। पार्टी की इमेज को सबसे बड़ा धक्का गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या से लगा। मान सरकार ने वीआईपी सुरक्षा में कटौती करने का फैसला करते हुए 28 मई को एक लिस्ट जारी की। इसमें गायक मूसेवाला का भी नाम था। अगले ही दिन 29 मई को ताबड़तोड़ फायरिंग कर मूसेवाला को मौत के घाट उतार दिया गया। देश विदेश में बड़ी फैन फालोइंग रखने वाले मूसेवाला की हत्या के बाद आप सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गई। कांग्रेस ने इस हत्याकांड को मान सरकार की अदूरदर्शिता का नतीजा बताया।
इसके बाद पार्टी बैकफुट पर आई। उपचुनाव में पार्टी की सबसे बड़ी चिंता ही गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मुद्दा था। आप के लिए इस सीट पर जीत इसलिए भी प्रतिष्ठा का सवाल थी क्योंकि इस सीट से मुख्यमंत्री भगवंत मान दो बार सांसद चुने गए हैं और इस समय राज्य में आप सरकार के मुखिया भी भगवंत मान ही हैं। मूसेवाला के हत्यारों को पकड़ने में पुलिस की नाकामी को देखते हुए पार्टी ने छह मंत्रियों-विधायकों को आप प्रत्याशी गुरमेल सिंह की मदद के लिए मैदान में उतार दिया था।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान प्रसिद्ध गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या, तीन कबड्डी खिलाड़ियों की हत्या, पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हमले जैसी घटनाओं ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का विपक्ष को मौका दिया था। इस दौरान गंभीर बिजली संकट भी एक बड़ा मुद्दा बन गया था।