भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले शहीद भगत सिंह और ऊधम सिंह की जीवनी संबंधी पाकिस्तान के स्कूलों में बच्चों को आज भी कुछ नहीं पढ़ाया जाता है। जबकि इन शहीदों का काफी समय लाहौर (पाकिस्तान) में बीता है। ऊधम सिंह ने चार साल तक पाकिस्तान की जेल रावल पिंडी, लाहौर, पेशावर व मियां वाली में काटे थे। जहां इंकलाबी गतिविधियां जारी रखने पर जेल में तीन बार कोड़े मारे गए थे। ऊधम सिंह ने पांच जून 1940 में अदालत में दी गई तकरीर वाले कागज में लिखा था लाहौर में बहुत सारे लोगों को मरते हुए देखा गया। ये सभी बातें पाकिस्तान के लेखक असीफ रजा ने स्काइप (इंटरनेट) पर बातचीत के दौरान अमर उजाला के संवाददाता से की।
पाकिस्तानी लेखक असीफ रजा का कहना है कि भगत सिंह का घर लाहौर में है और उसे लाहौर में ही फांसी दी गई थी और ऊधम सिंह ने लाहौर से अपना पासपोर्ट बनाया था। इसके अलावा चार साल तक पाकिस्तान की जेल रावल पिंडी, लाहौर, पेशावर व मियां वाली में काटे थे।
असीफ रजा का कहना है कि भारत के लेखक राकेश कुमार (रेल डिवीजन फिरोजपुर में इंजीनियर) ने शहीद ऊधम सिंह पर पुस्तक लिखी है। यही पुस्तक पाकिस्तान में लेखक राकेश कुमार के नाम पर प्रकाशित करना चाहते हैं।
पाकिस्तान में शहीद भगत सिंह पर बारह पुस्तकें उर्दू और पंजाबी में छपी हैं परंतु भगत सिंह के बारे में पाकिस्तान के स्कूलों में बच्चों को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। असीफ रजा ने बताया कि जहां उनका घर (लाहौर) है वहां से महज 150 फुट की दूरी पर अंग्रेजों ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह को फांसी दी थी।
वहां पर वो लोग पिछले पंद्रह साल से भगत सिंह के नाम का बोर्ड लगाना चाहते हैं, जो उन्हें पाकिस्तान के कुछ कट्टर पंथी लगाने नहीं दे रहे हैं। रजा ने बताया कि आज भी पाकिस्तान में भगत सिंह के शहीदी दिवस और जन्मदिवस मनाने के लिए भी उन्हें कोई गुप्त जगह तलाशनी पड़ती है।
रजा ने तेरह पुस्तकों का उल्था किया है तथा चार किताबें उनकी सूफीइज्म पर मार्केट में हैं। रजा ने बताया कि पाक के मशहूर लेखक बाबा नजवी ने अपनी उर्दू में लिखी पुस्तक (मेरा ना इंसान) में एक बार (कविता) में ऊधम सिंह के नाम का जिक्र किया हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों ही हमने गदर लहर के शहीदों बरकत अली व अन्य के बारे में एक पुस्तक प्रकाशित की है।