प्रिया बोलीं- स्थानीय लोगों के देश छोड़ने से हालात ज्यादा खराब होने लगे
यूक्रेन में जंग से हालात खराब तो थे। मगर ज्यादा खराब उस समय होने लगे जब यूक्रेनी लोगों ने अपना देश छोड़ दूसरे देशों में जाना शुरू कर दिया। दूसरे देशों में जाने के कारण यातायात ठप हो गया। यही वजह है कि भारतीय छात्रों को सैकड़ों किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ा। यह दर्द यूक्रेन से जालंधर के गोराया पहुंचीं छात्रा प्रिया ने बयां किया।
प्रिया ने बताया कि पहले हालात इतने खराब नहीं थे। लेकिन जब वहां की सरकार ने स्थानीय लोगों को हथियार मुहैया करवाना शुरू किया तो स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। प्रिया ने कहा कि हम जहां रहते थे, वहां से सीमा एक हजार किलोमीटर की दूरी पर थी। हमारा क्षेत्र ज्यादा खतरे वाला नहीं था। हम सभी काफी डरे थे। हमारी यूनिवर्सिटी ने हमें हर तरह की मदद की। वहां की फौज ने भी हमारा बहुत साथ दिया जिसके कारण हम सकुशल सीमा पार कर वतन लौटे।
प्रिया ने बताया कि हमारी यूनिवर्सिटी ने जानकारी दी कि जंग शुरू हो चुकी है। हालात खराब हो सकते हैं। आप अपने सारे दस्तावेज व बाकी तैयारी कर लें। आपको किसी भी समय यहां से निकलना पड़ सकता है। वहां पर सभी तरह की ट्रांजक्शन बंद हो गई थी और पैसे की काफी कमी हो गई थी। हमारी यूनिवर्सिटी ने हमारा सारा इंतजाम मुफ्त में किया। खाने से लेकर सीमा तक पहुंचने में हमारी पूरी मदद की। पुलिस की देखरेख में हमें रोमानिया पहुंचाया गया।
पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से नहीं मिली मदद
प्रिया के पिता डॉ. राजिंदर कुमार ने बताया कि बेटी को 26 फरवरी को फ्लाइट पकड़नी थी लेकिन 25 को वहां पर विस्फोट होना शुरू हो गया और एयरपोर्ट का रनवे टूट गया। उसके बाद मैंने बेटी से बात की तो उसने कहा कि यूनिवर्सिटी वाले उनकी मदद कर रहे हैं और केंद्र सरकार भी जोर लगा रही है। हम जल्द ही भारत आ जाएंगे। राजिंदर कुमार ने बताया कि पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिला है। उनकी बेटी घर लौट आई तो भी जालंधर जिला प्रशासन ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया।