फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन युद्ध: दो माह बाद मिलनी थी डिग्री, साफिया को वतन लौटना पड़ा, प्रिया ने बताया कैसे बिगड़े हालात

Sun, 06 Mar 2022 06:32 PM IST
ajay kumar नरिंदर वैद्य, संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

प्रिया ने बताया कि पहले हालात इतने खराब नहीं थे। लेकिन जब वहां की सरकार ने स्थानीय लोगों को हथियार मुहैया करवाना शुरू किया तो स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। प्रिया ने कहा कि हम जहां रहते थे, वहां से सीमा एक हजार किलोमीटर की दूरी पर थी।
विज्ञापन
यूक्रेन से लौटीं प्रिया व साफिया का स्वागत करते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूक्रेन से भारतीय छात्रों का लौटना जारी है। मगर उन्हें जंग के कारण छूटी अपनी पढ़ाई का दुख सता रहा है। कुछ छात्रों को तो दो माह बाद डिग्री मिलने वाली थी लेकिन उनका सपना इस जंग ने फिलहाल चकनाचूर कर दिया है। मेडिकल की छात्रा साफिया अग्रवाल यूक्रेन से वापस लौटी तो उनके चेहरे पर भारत लौटने की खुशी थी लेकिन चिंता की लकीरें भी साफ दिख रहीं थीं। 

विज्ञापन


गांव फत्तूधींगा की रहने वालीं साफिया अग्रवाल करीब छह साल से यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं थीं और दो माह बाद उन्हें डिग्री मिलनी थी लेकिन युद्ध के कारण बिना डिग्री लौटना पड़ा। साफिया खारकीव में रहतीं थीं और जंग शुरू होने के बाद वह जैसे-तैसे ट्रेन से लवीव पहुंचीं। इसके बाद टैक्सी से हंगरी सीमा पर पहुंचीं। यहां भारत सरकार ने उनकी काफी मदद की। 

साफिया ने बताया कि बुडापेस्ट एयरपोर्ट तक मोदी सरकार ने यूरोपियन बस का इंतजाम किया था। वहां से वह फ्लाइट से नई दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचीं व नई दिल्ली से वह शताब्दी एक्सप्रेस में जालंधर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अपने परिवार के बीच आकर खुशी मिली है मगर पढ़ाई पूरी न होने का गम भी है। साफिया ने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद वह डिग्री लेने दोबारा यूक्रेन जाएंगी। 

विज्ञापन

प्रिया बोलीं- स्थानीय लोगों के देश छोड़ने से हालात ज्यादा खराब होने लगे
यूक्रेन में जंग से हालात खराब तो थे। मगर ज्यादा खराब उस समय होने लगे जब यूक्रेनी लोगों ने अपना देश छोड़ दूसरे देशों में जाना शुरू कर दिया। दूसरे देशों में जाने के कारण यातायात ठप हो गया। यही वजह है कि भारतीय छात्रों को सैकड़ों किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ा। यह दर्द यूक्रेन से जालंधर के गोराया पहुंचीं छात्रा प्रिया ने बयां किया। 

प्रिया ने बताया कि पहले हालात इतने खराब नहीं थे। लेकिन जब वहां की सरकार ने स्थानीय लोगों को हथियार मुहैया करवाना शुरू किया तो स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। प्रिया ने कहा कि हम जहां रहते थे, वहां से सीमा एक हजार किलोमीटर की दूरी पर थी। हमारा क्षेत्र ज्यादा खतरे वाला नहीं था। हम सभी काफी डरे थे। हमारी यूनिवर्सिटी ने हमें हर तरह की मदद की। वहां की फौज ने भी हमारा बहुत साथ दिया जिसके कारण हम सकुशल सीमा पार कर वतन लौटे।
विज्ञापन

प्रिया ने बताया कि हमारी यूनिवर्सिटी ने जानकारी दी कि जंग शुरू हो चुकी है। हालात खराब हो सकते हैं। आप अपने सारे दस्तावेज व बाकी तैयारी कर लें। आपको किसी भी समय यहां से निकलना पड़ सकता है। वहां पर सभी तरह की ट्रांजक्शन बंद हो गई थी और पैसे की काफी कमी हो गई थी। हमारी यूनिवर्सिटी ने हमारा सारा इंतजाम मुफ्त में किया। खाने से लेकर सीमा तक पहुंचने में हमारी पूरी मदद की। पुलिस की देखरेख में हमें रोमानिया पहुंचाया गया। 

पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से नहीं मिली मदद
प्रिया के पिता डॉ. राजिंदर कुमार ने बताया कि बेटी को 26 फरवरी को फ्लाइट पकड़नी थी लेकिन 25 को वहां पर विस्फोट होना शुरू हो गया और एयरपोर्ट का रनवे टूट गया। उसके बाद मैंने बेटी से बात की तो उसने कहा कि यूनिवर्सिटी वाले उनकी मदद कर रहे हैं और केंद्र सरकार भी जोर लगा रही है। हम जल्द ही भारत आ जाएंगे। राजिंदर कुमार ने बताया कि पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिला है। उनकी बेटी घर लौट आई तो भी जालंधर जिला प्रशासन ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें