एनओसी या चूल्हा टैक्स न मिलने के आधार पर नामांकन खारिज न किया जाए
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने राज्य चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पंचायत चुनाव में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) या चूल्हा टैक्स न मिलने के आधार पर नामांकन पत्र खारिज नहीं किया जाए। राज्य चुनाव आयोग को लिखे पत्र में वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व मंत्री डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि आयुक्त राज कमल चौधरी ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने आयोग से सभी रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया कि यदि वे एनओसी न मिलने या चूल्हा टैक्स का भुगतान न करने के आधार पर किसी नामांकन को खारिज करना चाहते हैं तो उसे जांच के लिए आयोग को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल रिटर्निंग अधिकारी अंतिम समय में नामांकन खारिज करने के मकसद से जानबूझकर नामांकन पर फैसला लेने में देरी कर रहे हैं, ताकि आवेदकों के पास चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद उच्च न्यायालय में जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प न बचे।
डाॅ. चीमा ने कहा कि चूल्हा टैक्स के रूप में प्रति वर्ष सात रुपये का सांकेतिक भुगतान उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को खारिज करने के साथ-साथ विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने के लिए किया जा रहा है। 2018 में भी सरपंच पद के लिए 49 हजार नामांकनों में से 21 हजार नामांकन पत्र जांच के समय रद्द कर दिए गए थे। पंचों के नामांकन पत्रों के मामले में 1.6 लाख लोगों ने नामांकन पत्र भरे थे, जांच के बाद केवल एक लाख ही मैदान में रह गए थे।
शिअद नेता ने कहा कि नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया की आयोग द्वारा वीडियोग्राफी की जानी चाहिए और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रक्रिया की निगरानी के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त शिकायतों को भी आगे बढ़ाया।