शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मिलकर सुप्रीम कोर्ट में सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मामले में राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की।
शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री ने किस तरह आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के कहने पर सुप्रीम कोर्ट में पंजाब और पंजाबियों की पीठ में छुरा घोंपा है, जो राइपेरियन सिद्धांत का सीधा उल्लंघन करते हुए पंजाब का पानी हरियाणा और राजस्थान को देने पर आमादा हैं।
शिअद अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी पानी की एक बूंद भी पंजाब से बाहर नहीं जाने देगी। उन्होंने कहा, ‘न नहर बनेगी, न ही पानी है।’ उन्होंने राज्यपाल से यह भी अपील की है कि वे केंद्र सरकार को एसवाईएल नहर मुददे पर पंजाब के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने के लिए संसद में कानून लाने की सिफारिश करें और इसे राइपेरियन सिद्धांत के तहत सुलझाएं, जिसके तहत पंजाब को अपने क्षेत्र में बहने वाले पानी पर अविभाज्य अधिकार प्राप्त है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल बिक्रम सिंह मजीठिया, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, डॉ. सुखविंदर कुमार और अनिल जोशी ने राज्यपाल से कहा कि पंजाब से पानी हरियाणा तक पहुंचाने के इरादे से केंद्र सरकार की ओर से जबरन सर्वेक्षण कराने की कोशिश से पंजाब में किसानों का गुस्सा फूटने की संभावना है, जिसे रोकना बेहद मुश्किल होगा। यह कदम संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में शांति के अनुकूल भी नहीं होगा। ऐसा लगता है कि आप सरकार पंजाब के मामले में ठोस बहस करने में विफल रही है।
राजस्थान में पानी बहने से रोकेंगे
राज्यपाल से मुलाकात के बाद राजभवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि राज्य में कोई एसवाईएल नहर अब नहीं है, जिस जमीन पर नहर बनाई गई थी, उसे 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल ने किसानों को हस्तांतरित कर दिया था। उन्होंने कहा कि हमारे पास देने के लिए पानी नहीं है। राज्य में सत्ता संभालने के बाद अकाली दल सभी जल बंटवारा समझौतों को समाप्त कर देगा। हम राजस्थान में पानी बहने से रोकेंगे।