फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तारीख पे तारीख : बच्चों के कोविड अस्पताल समेत आरटीपीसीआर लैब और ऑक्सीजन प्लांट अब तक नहीं हो सके शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर से बचाव की तैयारियों की स्थिति सरकारी योजनाओं की हकीकत को साफ बयां कर रही है। तीसरी लहर आने से पहले सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को बच्चों के लिए आईसीयू बेड से युक्त अलग अस्पताल स्थापित करने के साथ आरटीपीसीआर जांच की सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया था। वहीं, संस्था के सहयोग से जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट भी स्थापित किए जाने थे, लेकिन अब तीसरी लहर का पीक गुजरने की स्थिति में है, लेकिन योजनाएं अभी अधर में लटकी हुई हैं। जीएमएसएच-16 में न ही बच्चों का अस्पताल स्थापित हो पाया है, न ही आरटीपीसीआर जांच की सुविधा ही शुरू हो सकी है। वहीं, ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट संचालित करने का सपना भी अधूरा ही है।
विज्ञापन

दो महीने बाद भी मशीन नहीं हो सकी इंस्टॉल
संक्रमण से बचाव के लिए ज्यादा से ज्यादा स्क्रीनिंग हो, इसके लिए आरटीपीसीआर जांच की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने जीएमएसएच-16 में जांच की सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया था। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 2 महीने पहले मशीन भी खरीद ली है, लेकिन अब तक उस मशीन को इंस्टॉल करने की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। आलम यह है कि उस मशीन को अस्पताल की लैब में एक किनारे रख दिया गया है। वहीं, जांच के लिए आने वाले मरीजों का नमूना अब भी जीएमसीएच 32 व पीजीआई में भेजा जा रहा है।
जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 के प्लांट को टेस्टिंग का इंतजार
कोरोना की दूसरी लहर से सबक लेते हुए सरकार ने सभी राज्यों को समय रहते भरपूर ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया था। इसके अंतर्गत एक एनजीओ के माध्यम से प्रशासन ने जीएमसीएच 32 व जीएमएसएच 16 में ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई थी, लेकिन योजना अब तक अधर में है। दोनों अस्पतालों में 800-800 लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) के प्लांट लगाए जा चुके हैं, लेकिन जांच की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण आज तक संचालन रुका हुआ है। ये दोनों प्लांट 31 जनवरी तक हर हाल में पूरे कर लिए जाने थे, लेकिन अब भी वही स्थिति है, जो एक महीने पहले थी।
विज्ञापन

यहां है इतनी ऑक्सीजन की व्यवस्था
पीजीआई: दो हजार एलपीएम
जीएमएसएच-16: 500 एलपीएम
जीएमसीएच-32: एक हजार एलपीएम
सेक्टर-48 अस्पताल: 100 एलपीएम
बच्चों के अस्पताल की अब आई याद
तीसरी लहर का पीक गुजरने के बाद स्वास्थ्य विभाग को जीएमएसएच-16 में प्रस्तावित बच्चों के कोविड डेडिकेटेड अस्पताल की याद आई है, जबकि सरकार के निर्देश पर यह अस्पताल बनाने का काम 15 नवंबर 2021 तक पूरा कर लेना था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग को न तो अलग भवन निर्माण कराने की जरूरत थी न ही मानव संसाधन जुटाने की। जीएमएसएच-16 के ही नर्सिंग हॉस्टल के भवन में 32 बेड के आईसीयू बेड वाले बच्चों के अस्पताल को संचालित करने की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन जनवरी 2022 गुजरने के बाद भी स्थिति जस की तस है। जानकारी के अनुसार अस्पताल के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने अब काम शुरू किया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
आरटीपीसीआर लैब के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने काम पूरा कर लिया है। मशीन को इंस्टॉल करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, बच्चों के कोविड-डेडिकेटेड सेंटर में इंजीनियरिंग विभाग ने काम शुरू कर दिया है।
विज्ञापन

-डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें