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शोध: कैंसर के स्लीपर सेल को ढूंढकर मारेगा कार्बोहाइड्रेट, मिलेगी कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत

Sat, 26 Nov 2022 05:53 PM IST
भूपेंद्र सिंह वीणा तिवारी, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

कोलकाता बोस इंस्टीट्यूट के डॉ. गौरीशंकर के शोध से कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। कैंसर रिसर्च एंड मेटाबॉलिज्म जरनल में शोध को जगह मिली है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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ट्यूमर के मरीजों में कीमोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी के बावजूद बार-बार स्थिति गंभीर होना एक बड़ी समस्या है। अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या से निपटने की राह तलाश ली है। कोलकाता बोस इंस्टीट्यूट के मॉलिक्यूलर मेडिसिन के डॉ. गौरीशंकर सा ने अपने शोध में बताया है कि कैंसर के मरीजों के आहार में बदलाव कर टी रेग्यूलेटरी सेल (स्लीपर सेल) को निष्क्रिय किया जा सकता है।

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इस शोध को कैंसर रिसर्च एंड मेटाबॉलिज्म जरनल में प्रकाशित किया गया है।
डॉ. गौरीशंकर सा ने अपने शोध से जुड़े परिणाम को पीजीआई में आयोजित इम्यूनोकॉन-2022 में बतौर वक्ता प्रस्तुत किया और  विश्वभर के विशेषज्ञों को कैंसर के इलाज की राह आसान करने का फॉर्मूला दिया। उन्होंने बताया कि टी रेग्यूलेटरी सेल ऐसे स्टेम सेल होते हैं जो कीमो और इम्यूनोथैरेपी के बाद भी बच जाते हैं और कैंसर रिलेप्स का कारण बनते हैं। उन्होंने बताया कि कीमो और इम्यूनोथैरेपी के बाद ट्यूमर के बचे स्टेम सेल ड्रग रजिस्टेंस बन जाते हैं।

ये सेल आस-पास के सेल को तेजी से संक्रमित करते हैं। उस स्टेम सेल को इम्यूनोथैरेपी में लक्ष्य बनाकर मारने का प्रयास किया जाता है लेकिन इसमें महज 20 प्रतिशत मरीजों में लाभ मिल पा रहा था। 80 प्रतिशत मरीजों पर प्रभाव नगण्य था। इस समस्या को दूर करने के लिए टी रेग्यूलेटरी सेल को समाप्त करने का दूसरा उपाय तलाशा गया।
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आहार पर लगेगा रोक तो मरेगा टी सेल
डॉ. गौरीशंकर ने बताया कि शरीर में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है जबकि कैंसर सेल फैटी एसिड से आहार प्राप्त करते हैं। इस आधार पर यह तय किया गया कि रिलेप्स होने वाले मरीजों पर इस आहार का परिणाम चेक किया जाए। इसके लिए 600 मरीजों को चिह्नित किया गया। इन मरीजों को दो हिस्सों में बांटा गया और कीमोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी के दौरान एक ग्रुप के मरीजों को ग्लूकोज और उच्च कोर्बोहाइड्रेट वाला आहार दिया गया जबकि फैटी एसिड वाले ग्रुप के मरीजों को आहार की मात्रा कम कर दी गई। धीरे-धीरे उन मरीजों में ट्यूमर के टी रेग्यूलेटरी सेल समाप्त होने लगे क्योंकि उन सेल को जीवित रहने के लिए आवश्यक आहार नहीं मिला। फिर उन मरीजों पर थैरेपी का परिणाम सकारात्मक आने लगा और सफलता दर 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत पर आ गई।

ये है कार्बोहाइड्रेट
विटामिन और खनिज की तरह कार्बोहाइड्रेट भी मुख्य पोषक तत्व है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला आवश्यक स्रोत है। हमारा पाचन तंत्र कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज मतलब रक्त शर्करा में बदल देता है। इस ग्लूकोज का उपयोग हमारे शरीर की कोशिकाएं, ऊतक और अंग ऊर्जा प्राप्त करने के लिए करते हैं।  

मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है कार्बोहाइड्रेट
शुगर : जब हमारा पाचन तंत्र कार्बोहाइड्रेट को तोड़ता है तो प्रतिक्रिया स्वरूप यह ग्लूकोज के रूप में परिवर्तित हो जाता है। शरीर इसका इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में करता है।
स्टार्च : यह भी कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है।
फाइबर : यह शरीर के वजन को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।

कार्बोहाइड्रेट के फायदे
कार्बोहाइड्रेट युक्त खाना शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र से जुड़ी हुई कई बीमारियों की जड़ माने जाने वाले मोटापे को नियंत्रित करता है। कार्बोहाइड्रेट हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा दूर होता है। इसके अलावा यह आपके रक्त में मौजूद शुगर को भी नियंत्रित करने में आपकी मदद करता है।

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