प्रशासन ने हाल ही में शहर के हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के घरों में बदलाव के लिए जिन 13 सिफारिशों को मंजूर किया है, उसका फायदा सिर्फ पांच फीसदी मकान में रहने वालों को ही मिलेगा। क्योंकि हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले निवासी इससे ज्यादा बदलाव की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा जो बदलाव मंजूर किए गए हैं, वह निवासी पहले ही कर चुके हैं, जिसे प्रशासन और बोर्ड वायलेंशन बताता है। प्रशासन की ओर से बदलाव की जो मंजूरी दी गई है, उसमें अधिकतर एचआईजी मकानों को ही राहत मिलेगा। उदाहरण के तौर पर एक शर्त यह है घर के अंदर साढ़े चार इंच की दीवार को हटाया जा सकता है जबकि एलआईजी और एमआईजी के मकानों के अंदर यह दीवार नहीं बनी है।
ऐसे में रेजिडेंट्स ने इन बदलावों को मंजूर करने के फैसले को झुनझुना करार दिया है। शहर में 48 हजार हाउसिंग बोर्ड के मकान हैं, इसमें रहने वाले आठ साल से मांग कर रहे हैं कि लोगों ने अपने प्लॉट एरिया में जो बदलाव किए हैं, उन सभी को मंजूरी दी जाए।
बोर्ड करना चाहता है लेकिन प्रशासन मंजूरी देने को तैयार नहीं
बोर्ड पहले अधिक बदलाव की मंजूरी देने को तैयार नहीं था पर अब बोर्ड लोगों की मांग को पूरी करना चाहता है। लेकिन प्रशासन का वास्तुकार विभाग बोर्ड की ओर से प्रस्तावित मंजूरी पर आपत्ति जताकर इसे रोक रहा है। जबकि सीएचबी रेजिडेंट्स फेडरेशन मकानों में अलग अलग बदलाव का प्रस्ताव बोर्ड को दे चुका है। बोर्ड इन सिफारिशों को प्रशासन को भेज चुका है।
बरामदे में कमरे का जिक्र नहीं
नए बदलाव की जो सिफारिशें सामने आई हैं, उनमें पिछले बरामदे में कमरा निर्माण करने का जिक्र नहीं है। लोग इसकी मांग कर रहे थे, जिनके घर के पिछली तरफ बरामदा है। साल 2010 में दी गई मंजूरी में 10 फुट जगह छोड़कर कमरा बनाने की मंजूरी दी गई थी।
लेकिन एक बड़ी राहत जरूर है
प्रशासन की ओर पहली बार एक राहत देने वाला काम किया गया है। उक्त बदलाव के लिए बोर्ड से अलग से मंजूरी लेने की जरूरी नहीं है। पहले जब भी नीड बेस्ड चेंज के लिए मंजूरी दी गई, उसके लिए बोर्ड से नक्शा पास करवाना जरूरी था। इस पर बोर्ड के अधिकारी मौके का निरीक्षण करके अन्य वायलेशन गिनाते हुए नोटिस थमा देते थे।
नोटिस पर लगी है पाबंदी
इस समय बोर्ड ने लोगों को वायलेशन के नोटिस पर पाबंदी लगाई हुई है। साथ ही बोर्ड की ओर से मकानों को ट्रांसफर करते हुए उसका मालिकाना हक भी दिया जा रहा है जबकि पुनर्वास योजना के तहत मकान में रहने वालों को यह सुविधा नहीं है।
रजत मल्होत्रा, प्रवक्ता, सीएचबी रेजिडेंट्स फेडरेशन ने बताया कि प्रशासन की ओर से जिन बदलावों को मंजूरी दी गई है, उससे सिर्फ पांच फीसदी लोगों को ही मुश्किल से फायदा मिलेगा। प्रशासन ने एचआईजी के मकानों को ध्यान में रखकर यह बदलाव किए हैं जबकि हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले लोग मांग कर रहे हैं कि उनके प्लॉट के कवर एरिया में जो भी निर्माण हो चुका है, उसे मंजूर किया जाए।
निर्मल दत्त, चेयरमैन, सीएचबी रेजिडेंट्स फेडरेशन ने बताया कि प्रशासन की ओर से जो 13 बदलाव की मंजूरी है, वह नए नहीं हैं। साल 2010 में जो छह माह के लिए 52 जरूरी परिवर्तनों को मंजूरी दी थी, यह नए बदलाव भी उनमें से ही हैं, जो लोगों के लिए एक झुनझुना है। कवर एरिया में जो भी बदलाव हो चुके हैं, उनकी मंजूरी के लिए संघर्ष जारी रहेगा।