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सबसे बड़ा सवाल: अब कौन करेगा निवेश झुलसे हरियाणा में?

Tue, 23 Feb 2016 09:19 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आरक्षण की मांग को लेकर शुरू हुए जाट आंदोलन की हिंसा ने हरियाणा को विकास की पटरी से उतार दिया है। आगजनी और लूटपाट ने प्रदेश के अधिकतर बड़े शहरों की ऐसी सूरत बना दी है कि इसमें रह रहे लोग भी भयभीत हैं।
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एक हफ्ते से जारी इस आंदोलन से सबसे ज्यादा नुकसान उद्योग जगत को पहुंचा है। हरियाणा सरकार के ‘हैपनिंग हरियाणा’ पर इसका सीधा असर होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले साल नई उद्योग नीति लाने के बाद से प्रदेश में निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार दिन-रात मेहनत कर रही थी।

इसी कड़ी में आगामी 7, 8 और 9 मार्च में गुड़गांव में हैपनिंग हरियाणा समिट की तैयारी की जा रही है। लेकिन आरक्षण आंदोलन की आग में प्रदेश जिस तरह झुलसा है, उससे सरकार की चिंता भी बढ़ गई है। जाट आंदोलन की आग में जलकर स्वाह हो चुके शहरों में अब कौन निवेश करने की हिम्मत लेकर हरियाणा आएगा।
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एसोचैम के अनुसार आंदोलन के कारण उद्योगों को 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जबकि पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आंदोलन से 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया है। सीआईआई भी उद्योग जगत को हुए नुकसान से चिंतित है।

आंदोलन के कारण गुड़गांव में जहां ऑटोमोबाइल की बड़ी कंपनियों पर ताले लटक गए हैं वहीं रोहतक, झज्जर, बहादुरगढ़, हिसार, भिवानी, जींद, गोहाना, सोनीपत, कैथल, करनाल और पानीपत में उद्योग और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।

खास बात यह भी है कि यह सभी जिले प्रदेश में मध्यम और छोटे उद्योगों के प्रमुख स्थलों के रूप में पहचान बना चुके हैं। पानीपत में टेक्सटाइल व पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री, फरीदाबाद में लाइट इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री, गुडग़ांव में ऑटो पार्ट इंडस्ट्री, सोनीपत, मेवात में फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री, राई में प्रिंटिंग इंडस्ट्री और रोजका मेव में मार्बल और स्टोन कटिंग इंडस्ट्री को जाट आंदोलन से गहरा झटका लगा है।

निवेश पर चिंता बरकरार
जाट आंदोलन के चलते गुड़गांव में मारुति सुजूकी के दोनों प्लांट बंद हो चुके हैं । इस औद्योगिक इकाई को माल सप्लाई करने वाली करीब 300 वैंडर कंपनियां भी आर्थिक संकट में घिर गई हैं।

सरकार इसी शहर में हैपनिंग हरियाणा समिट आयोजित करने की तैयारी कर चुकी है। समिट में देश-विदेश के उद्यमी और निवेशकों को आमंत्रित किया गया है लेकिन मौजूदा हालात में कितने निवेशक प्रदेश में निवेश करने में रुचि दिखाएंगे, इसे लेकर संबंधित अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है।

रामबिलास शर्मा, कैबिनेट मंत्री, हरियाणा ने बताया कि हैपनिंग हरियाणा समिट तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा। इसे रद्द या स्थगित करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
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