कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला
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राज्यसभा चुनाव में राजस्थान से जीत के बाद हरियाणा के पूर्व मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला का सियासी कद बढ़ गया है। कांग्रेस हाईकमान ने भितरघात के भय से हरियाणा के बजाय राजस्थान से उनको उम्मीदवार बनाया था। बिना कोई रिस्क लिए हाईकमान ने सुरजेवाला को मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी के मुकाबले पहली प्राथमिकता दी। राज्यसभा सदस्य चुने के बाद अब हरियाणा में सुरजेवाला समर्थकों में खासा जोश है और उनके स्वागत के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
सुरजेवाला की गिनती कांग्रेस हाईकमान के करीबियों में होती है। फिलहाल वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता हैं। अब सुरजेवाला के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस उन्हें केंद्र सरकार को घेरने के लिए राज्यसभा में भी खुलकर उपयोग करेगी।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले से साफ हो गया है कि अब केंद्र में सुरजेवाला अहम भूमिका में होंगे। राज्यसभा चुनाव में हरियाणा से दो नेताओं रणदीप सिंह व कुमारी सैलजा को उतारने पर चर्चा की गई थी लेकिन गुटबाजी के चलते इस फैसले को बदल दिया गया और यहां पर अजय माकन को भेजा गया। सुरजेवाला की राह आसान करने के लिए ही हाईकमान ने उनको राजस्थान भेजा था।
दो चुनाव हार गए थे सुरजेवाला
हरियाणा से सुरजेवाला पिछले दो चुनाव हार गए थे। जींद उपचुनाव में कांग्रेस ने उन्हें उतारा था लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। इसके अलावा कैथल सीट से भी इस बार सुरजेवाला को हार का मुंह देखना पड़ा। कांग्रेस की अंर्तकलह इसका कारण रही। यह वजह थी कि कांग्रेस ने सुरजेवाला को हरियाणा से चुनाव न लड़वा कर राजस्थान से चुनाव लड़वाया।