चंडीगढ़। गुरुग्राम निवासी बिजनेसमैन अतुल्य शर्मा से पांच करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने आरोपी रामलाल चौधरी के बेटे अमित उर्फ अम्मू को गिरफ्तार कर लिया है। करीब छह महीने से फरार चल रहे आरोपी को सेक्टर-46 स्थित उसके घर से दबोचा गया।
पुलिस ने आरोपी को शुक्रवार को जिला अदालत में पेश किया जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अमित अब तक कहां छिपा रहा, इस बारे में पुलिस पूछताछ कर रही है। इस मामले में पुलिस को अभी रामलाल की बेटी अंजू की भी तलाश है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि रामलाल के पास अलग-अलग जगहों पर करीब 150 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। इनमें सबसे ज्यादा संपत्ति उसके बड़े बेटे अमित के नाम पर हैं।
एसआईटी को सूचना मिली थी कि रामलाल का बेटा बुधवार को अपने सेक्टर-46 स्थित घर आया हुआ है। इसके बाद सेक्टर-34 थाना प्रभारी दविंदर सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन कर आरोपी को दबोच लिया। पुलिस रिमांड पर आरोपी के ठिकानों के बारे में जानकारी हासिल करेगी। इस दौरान किसने उसे पनाह दी इसकी भी जांच होगी। पुलिस के अनुसार रामलाल के साथ धोखाधड़ी में अमित और अंजू भी शामिल हैं। इन दोनों ने ही पीड़ितों से बात की और मिले थे। एसआईटी के अनुसार, आरोपी की जांच पड़ताल के बाद अमित की दूसरे मामलों में भी गिरफ्तारी की जाएगी। रिमांड के बाद पुलिस शनिवार को अदालत अमित को जिला अदालत में पेश करेगी। रामलाल के खिलाफ तीनों केसों की जांच के लिए एसएसपी कुलदीप चहल ने एसआईटी गठित की थी।
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रियल एस्टेट में रुपये निवेश करने का दिया था झांसा
पीड़ित अतुल्य शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि दिल्ली के एक आश्रम में रामलाल चौधरी से उनकी मुलाकात हुई थी। रामलाल ने उनको रियल एस्टेट के बिजनेस में पांच करोड़ रुपये निवेश करने का सुझाव दिया। इतने रुपये न होने के बावजूद रामलाल ने उन पर जल्द निवेश करने का दबाव बनाया। अतुल्य ने मुंबई स्थित अपना फ्लैट और गहने बेचकर, साथ ही कर्ज लेकर वर्ष 2015-16 में दिल्ली और चंडीगढ़ में अलग-अलग किस्तों में पांच करोड़ रुपये नगद रामलाल को दे दिए। आरोप है कि रामलाल ने इस रकम को कहीं भी निवेश नहीं किया और जब अतुल्य ने अपने रुपये मांगे तो आनाकानी करने लगा। बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया। पीड़ित को जब ठगी का अहसास हुआ तो उसने एसएसपी को शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के बाद 11 नवंबर 2021 को रामलाल चौधरी के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था।
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तीसरे केस में रामलाल को जेल से लाकर किया था गिरफ्तार
एसआईटी ने 29 अप्रैल को रामलाल चौधरी को 85 लाख रुपये की धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में बुड़ैल जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर गिरफ्तार किया था। इस मामले में आरोपी का दो दिन के रिमांड मिला था। पुलिस के मुताबिक रामलाल चौधरी ने लुधियाना निवासी तेजा सिंह से उसके बेटे को हत्या के एक मामले में बरी करवाने के लिए यह रुपये लिए थे, लेकिन उसके बेटे को अदालत से सजा हो गई। इस मामले में सेक्टर-34 थाना पुलिस ने रामलाल के खिलाफ 10 जनवरी 2022 को तीसरी एफआईआर दर्ज की थी। रामलाल के खिलाफ सेक्टर-34 थाने में धोखाधड़ी की पहले से ही दो एफआईआर दर्ज हैं। साल 2012 में तेजा सिंह के बेटे बरजिंदर सिंह को पुलिस ने हत्या के एक केस में गिरफ्तार किया था।
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पंचकूला के पूर्व जिला राजस्व अधिकारी से भी धोखाधड़ी का आरोप
रामलाल पर पंचकूला के पूर्व जिला राजस्व अधिकारी नरेश कुमार के साथ 6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का भी आरोप है। नरेश ने शिकायत में बताया कि फरवरी 2015 में विजिलेंस हरियाणा को 250 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत मिली थी। केस से नाम हटवाने के नाम पर रामलाल चौधरी ने 6 करोड़ रुपये मांगे थे। आरोपी को पहली किस्त के तौर पर तीन करोड़ रुपये देने के बावजूद विजलेंस ने उसका नाम एफआईआर में दर्ज कर लिया था।