बहुचर्चित रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में 19 साल बाद पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह समेत पांच लोगों को दोषी करार दिया है। अब तक इस मामले में 250 पेशी और 61 लोगों की गवाही हो चुकी है। रणजीत सिंह हत्याकांड में तीन गवाह महत्वपूर्ण थे। इनमें दो चश्मदीद गवाह सुखदेव सिंह और जोगिंद्र सिंह हैं। इनका कहना था कि उन्होंने आरोपियों को रणजीत सिंह पर गोली चलाते देखा था।
तीसरा गवाह डेरामुखी का ड्राइवर खट्टा सिंह था, उसके सामने ही रणजीत सिंह को मारने की साजिश रची गई थी। खट्टा सिंह ने अपने बयान में कहा था कि गुरमीत राम रहीम ने उनके सामने ही रणजीत सिंह को मारने के लिए बोला था। हालांकि बाद में खट्टा सिंह अदालत के सामने बयान से मुकर गया था। कई साल बाद खट्टा सिंह फिर से कोर्ट में पेश हुआ और गवाही दी।
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छत्रपति रामचंद्र हत्याकांड में भी डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह के ड्राइवर खट्टा सिंह मुख्य गवाह थे। इनकी ही गवाही पर कोर्ट ने सजा सुनवाई थी। साध्वी यौन शोषण मामले में जो पत्र लिखे गए थे, उनको ही छत्रपति रामचंद्र ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था।
छत्रपति पर पहले दबाव बनाया गया था। जब वे धमकियों के आगे नहीं झुके तो 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा में घर के बाहर ही उनको गोली मार दी गई थी। 28 दिन बाद 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उपचार के दौरान छत्रपति रामचंद्र ने दम तोड़ दिया था।
यह था रणजीत सिंह हत्याकांड
10 जुलाई 2002 को डेरे की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। क्योंकि डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से ही लिखवाई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत सिंह के बेटे जगसीर सिंह ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी।
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हाईकोर्ट ने बेटे के पक्ष में फैसला सुनाकर केस की जांच सीबीआई को सौंपी थी। मामले की जांच करते हुए सीबीआई ने राम रहीम समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। 2007 में कोर्ट ने आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए थे। हालांकि, शुरूआत में इस मामले में डेरामुखी का नाम नहीं था लेकिन 2003 में जांच सीबीआई को सौंपने के बाद 2006 में राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान के आधार पर डेरा प्रमुख का नाम इस हत्याकांड में शामिल हुआ था।