सरकार ऑस्ट्रेलिया के साथ दूध खरीदने को लेकर अगले माह समझौता करने जा रही है, जिसके तहत दूध 20-22 रुपये प्रति किलोग्राम बेचने की योजना है। जब तक किसान संबंधी किसी भी मुद्दे को लेकर सरकार नीति बनाने से पहले किसानों से बात नहीं करेगी तो कोई भी कानून नहीं बनाने दिया जाएगा। ऐसे में किसानों को एक और बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। यह बात भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को जगाधरी की अनाज मंडी में किसान धन्यवाद व विजय दिवस महापंचायत में कही।
उन्होंने कहा कि देश के अंदर के हालात ठीक नहीं है। कई प्रदेशों में दौरा करने के बाद देखा कि दूर दराज के इलाकों के किसान व आदिवासी लोगों का अब तक कोई विकास नहीं हुआ। 13 माह तक चले आंदोलन के बाद तीन कृषि कानूनों की वापसी तो अभी शुरुआत है। किसानों को अभी लंबी लड़ाई के लिए तैयार होना होगा।
दिल्ली आंदोलन को उन्होंने किसानों के लिए ट्रेनिंग कैंप बताया, जहां आंदोलन के दौरान मिली सीख को ग्रहण कर उन्होंने किसानों से बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कभी गरीब, मजदूर, बेरोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे मुद्दों पर बात नहीं करती और विकास के नाम पर लोगों को गुमराह करती है। सरकार की नीतियां पूंजीपतियों के लिए बनाई जा रही हैं, इसलिए मजदूर और किसान की लड़ाई अभी बाकी है। महापंचायत में उनके साथ किसान नेता युद्धवीर सिंह और प्रदेशाध्यक्ष रतनमान भी मौजूद रहे। इससे पहले भाकियू के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में राकेश टिकैत को पगड़ी पहनाकर और गदा भेंटकर सम्मानित किया गया।