मार्च में हो रही बारिश के कारण इस बार गेहूं उत्पादन पर संकट मंडराना शुरू हो गया है। बारिश के कारण इस बार न केवल किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा, बल्कि प्रदेशवासियों को भी गेहूं की कमी से जूझना पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो बारिश के कारण अभी तक प्रदेश में गेहूं की पैदावार 10 से 15 फीसदी तक प्रभावित हो चुकी है। आने वाले दिनों में यदि मौसम में सुधार नहीं हुआ तो गेहूं की फसल को और अधिक नुकसान होने की संभावना है।
प्रदेश सरकार ने इस बार गेहूं की खरीद के लिए 118 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश ने गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा दिया। एचएचयू (हरियाणा कृषिं विश्वविद्यालय) हिसार के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश में 25.2 लाख हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल है। इसमें करीब 70 प्रतिशत अगेती प्रजाति और बाकी जमीन पर पछेती प्रजाति की फसल है। पिछले दिनों हुई बारिश के कारण अगेती प्रजाति को अब तक 10 से 15 फीसदी तक नुकसान हो चुका है।
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो यदि आने वाले दिनों में भी बारिश होती है तो गेहूं उत्पादन पर और अधिक संकट आएगा। गेहूं की पैदावार और भी कम हो सकती है। ऐसे में सरकार की तरफ से रखा गया निर्धारित लक्ष्य भी पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा। सरकार ने गेहूं की खरीद से पहले इस संबंध में एचएयू के वैज्ञानिकों से भी सर्वे रिपोर्ट मांगी है।
पिछले वर्ष भी कम हुई थी पैदावार
पिछले वर्ष के आंकड़े देखें तो प्रदेश में 24.78 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल थी। सरकार ने 114 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया था। उस समय भी बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की पैदावार पर 20 से 25 फीसदी तक कमी आयी थी, जिस कारण सरकार का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका था। इसके अलावा सरसों और आलू की पैदावार में भी भारी कमी आयी थी।
वर्जन
मार्च में गेहूं की अगेती प्रजाति लगभग तैयार हो जाती है। ऐसे में बारिश के कारण इस प्रजाति को अधिक नुकसान हुआ है। इससे प्रदेश के गेहूं उत्पादन में कमी आएगी।
डॉ. आरएस अंतिल, विस्तार शिक्षा निदेशक एचएयू हिसार