महिलाओं के साथ किसी भी तरह के अपराध पर तुरंत कार्रवाई कर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाली चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली इन दिनों एक चर्चित मामले में सवालों के घेरे में है। मामला जूनियर कोच के यौन शोषण का है। इसमें हरियाणा के मंत्री संदीप सिंह आरोपी हैं। एफआईआर दर्ज होने के 250 दिन बीतने के बाद भी चंडीगढ़ पुलिस ने संदीप सिंह को गिरफ्तार नहीं किया है। ऐसा नहीं है कि महिला कोच की ओर से कराई गई एफआईआर महज आरोप मात्र है।
पुलिस की एसआईटी ने सात माह की जांच के बाद आरोपों को सही मानते हुए 25 अगस्त को आईपीसी की धारा 342, 354, 354ए, 354बी, 506, 509 के तहत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। एसआईटी की जांच में एक-एक कर मंत्री पर लगाए गए आरोप साबित होते जा रहे थे फिर भी चार्जशीट दाखिल होने तक पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित कोच के वकील दीपांशु बंसल का कहना है कि चंडीगढ़ पुलिस ने मामले में विस्तृत जांच की मगर दुष्कर्म के प्रयास की धारा नहीं लगाई, जिसे लगवाने का प्रयास अदालत के समक्ष किया जाएगा। केस में गैर-जमानती धारा लगी है। गैर-जमानती धाराओं में दर्ज मामले में पुलिस बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। इस मामले में भी अगर इन धाराओं के तहत केस मंत्री की जगह आम व्यक्ति पर दर्ज किया गया होता तो तुरंत उसकी गिरफ्तारी कर ली जाती। दीपांशु का आरोप है कि इस मामले में पुलिस कहीं न कहीं सरकार के दबाव में है।