चंडीगढ़ में लगातार हर समय दौड़ रहे वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर की जानकारी अब हर घंटे के अंतराल पर मिल जाएगी। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (कंटीन्युअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम) लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। 1.20 करोड़ की लागत से लगने वाले इस सिस्टम से शहरवासी यह जान सकेंगे कि शहर में प्रदूषण का स्तर कितना है। साथ यह भी जान सकेंगे कि वाहनों ने कितनी हानिकारक गैस का उत्सर्जन किया है।
प्रदूषण की स्थिति डाटा सिस्टम में लगे डिस्प्ले बोर्ड पर लगातार अपडेट होती रहेगी। अभी शहर के कई स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड लगे हैं, जिसके आंकड़े करीब 24 घंटे बाद अपडेट होते हैं। ऐसे में रियल टाइम पॉल्यूशन लेवल का पता नहीं चल पाता है। शहर में वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। अभी सिटी की आबादी लगभग 12 लाख है, जबकि यहां वाहनों की संख्या तकरीबन 11 लाख है। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं लोगों के जीवन में जहर घोलता जा रहा है।
यही वजह ह कि पहली बार चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (कंटीन्युअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम) लगाया जाएगा। इस संदर्भ में चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) के चेयरमैन टीसी नौटियाल ने बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (कंटीन्युअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम) लगने से शहर में रियल टाइम पॉल्यूशन की जानकारी मिल जाएगी। इसे पंजाब यूनिवर्सिटी के कैंपस में लगवाया जा रहा है। जून के पहले हप्ते में इसे लगवाने का काम शुरू हो जाएगा।
डिपार्टमेंट के पास मानीटरिंग सिस्टम आ चुका है। नौटियाल के अनुसार, सिस्टम के लगने के बाद वाहनों से उत्सर्जित होने वाले धुएं का जो रियल टाइम डाटा सामने आएगा, उससे नागरिकों को शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति का पता लगेगा। इससे नागरिकों में वाहनों के रखरखाव के साथ ही पर्यावरण को साफ बनाए रखने के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
वाहनों से निकलने वाला धुआं है खतरनाक
सीपीसीसी के चेयरमैन ने बताया कि वायु प्रदूषण के लिए केवल चिमनियों से निकलने वाला धुआं ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि वाहनों से निकलने वाला धुआं भी उतना ही जिम्मेदार है।
ऐसे काम करेगा सिस्टम
वायु गुणवत्ता सूचकांक 30 मिनट के अंतराल में सामान्य वातावरण और कुछ गैसों का रियल टाइम डाटा डिस्प्ले करेगा जबकि हर एक घंटे के अंतराल में बाकी के आठ पैरामीटर की स्थिति बताएगा। इसमें सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, लेड, कार्बन मोनोऑक्साइड, अमोनिया, बेंजीन, आर्सेेनिक, निकिल आदि शामिल हैं।
अभी देश में यहां लगा है सिस्टम
अभी यह मॉनीटरिंग सिस्टम दिल्ली, मुंबई, आगरा जैसे बड़े शहरों में लगा है। नए सिस्टम के लिए जिन नए शहरों को चुना गया है, उनमें भोपाल के साथ ही इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन व चंडीगढ़ शामिल है।