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गजब व्यवस्था: पंजाब में नहीं कराई 10वीं व 12वीं की परीक्षा, मगर छात्रों से 94.56 करोड़ की फीस वसूली, नहीं लौटाया पैसा

Thu, 07 Apr 2022 09:34 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बोर्ड के इस उगाही वाले रवैये के खिलाफ कई कर्मचारी संगठन, अभिभावक और सियासी दल आगे आने लगे हैं। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने परीक्षा फीस के नाम पर वसूला गया सारा पैसा वापस करने और प्रमाणपत्र फीस की शर्त वापस लेने की मांग की।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग के लिए कोविड-19 मुनाफे का सौदा रहा। विभाग ने 2019-20 और 2020-21 के सत्र में 10वीं और 12वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा के नाम पर विद्यार्थियों से 94.56 करोड़ रुपये वसूले लेकिन कोविड प्रतिबंधों की वजह से परीक्षाओं का आयोजन ही नहीं किया और सीधे रिजल्ट जारी कर दिया। यही नहीं, विभाग ने इसके बाद विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र की हार्ड कॉपी के लिए 800 रुपये 'प्रमाणपत्र फीस' के रूप में जमा कराने का फरमान भी सुना दिया।

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डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह, महासचिव मुकेश कुमार और उपाध्यक्ष रघवीर सिंह भवानीगढ़ ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2019-20 और 2020-21 के दौरान छह लाख से अधिक विद्यार्थियों ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा फीस जमा कराई थी। शिक्षा बोर्ड को 10वीं कक्षा के करीब 38.75 करोड़ और 12वीं कक्षा के 55.81 करोड़ रुपये मिले। कोरोना संक्रमण की वजह से परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया गया। खास बात यह है कि विद्यार्थियों को परीक्षा फीस भी नहीं लौटाई गई। बोर्ड के इस उगाही वाले रवैये के खिलाफ कई कर्मचारी संगठन, अभिभावक और सियासी दल आगे आने लगे हैं। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने परीक्षा फीस के नाम पर वसूला गया सारा पैसा वापस करने और प्रमाणपत्र फीस की शर्त वापस लेने की मांग की।

विद्यार्थियों का पैसा वापस करे शिक्षा बोर्ड: शिअद
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान से छात्रों को पैसे वापस करने की अपील की। पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि जहां एक तरफ मुख्यमंत्री निजी स्कूलों के कामकाज को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य शिक्षा बोर्ड को व्यवसायिक गतिविधि न बनाया जाए। छात्रों को परीक्षा फीस वापस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड का यह कहना कि पेपर छपवाए थे, सिर्फ बहाना है। छपाई पर छोटी सी लागत आती है। अगर आवश्यक हो तो छात्रों के 1100 रुपये में से छोटी सी राशि काटी जा सकती है और शेष राशि उन्हें वापस की जानी चाहिए। 

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शिक्षा मंत्री से मिले समग्र और मिड डे मील दफ्तरी मुलाजिम
पंजाब में सर्व शिक्षा अभियान समग्र और मिड डे मील दफ्तरी मुलाजिमों के शिष्टमंडल ने गुरुवार को पंजाब भवन में शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर से मुलाकात की। इस मीटिंग के दौरान शिष्टमंडल ने कच्चे मुलाजिमों को नियमित करने के अलावा वेतन कटौती, दूरदूराज के इलाकों में ड्यूटी पर तैनाती और छठे वेतन आयोग को लागू करने की मांग रखी।

शिक्षा मंत्री ने मुलाजिमों की मांगों को ध्यान से सुना और जल्द ही मांगों को हल करने का भरोसा दिया। यूनियन के नेता रजिंदर सिंह संधा, कुलदीप सिंह और दविंदरजीत सिंह ने बाद में बताया कि दफ्तरी कर्मचारियों के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है। सरकार ने 1 अप्रैल, 2018 को शिक्षकों को नियमित तो कर दिया था लेकिन दफ्तरी कर्मचारियों को उसमें पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया।
 
कांग्रेस सरकार के समय सरकार ने इन कर्मचारियों का तकरीबन 5 हजार रुपये प्रति महीना वेतन भी काट लिया था और कर्मचारियों को दूरदराज इलाकों में तैनात कर दिया था। इससे कर्मचारियों को मानसिक और वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। शिक्षा मंत्री के साथ विस्तार से बातचीत की गई और शिक्षा मंत्री की तरफ से भी भरोसा दिया गया कि सरकार कर्मचारियों को नियमित करने की नीति पर काम कर रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि विभागीय मसले- वेतन कटौती और दूरदराज ड्यूटियों का मामला तुरंत हल किया जाएगा।
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