अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी और पनबस के संविदा कर्मियों ने मंगलवार को भी सरकारी बसें नहीं चलने दीं। हालांकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के वार्ता के आमंत्रण के बाद हड़ताली कर्मचारियों ने सिसवां फार्म हाउस का घेराव टाल दिया।
कर्मचारियों ने पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी के 27 डिपो में 2000 से अधिक बसों को खड़ा कर दिया है। केवल 200 बसें सड़कों पर दौड़ीं जिसके कारण यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यूनियन नेताओं का कहना है कि बुधवार को यूनियन नेताओं की सीएम के साथ बैठक है। इस बैठक में कोई नतीजा नहीं निकलता तो वे अगले संघर्ष का एलान कर सकते हैं।
बुधवार को भी बसें नहीं चलेंगी। स्थानीय स्तर पर यूनियन नेता मोटरसाइकिल रैली का आयोजन करेंगे। पंजाब रोडवेज पनबस-पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन लुधियाना डिपो प्रधान शमशेर सिंह ढिल्लों ने बताया कि बीते दो दिन की हड़ताल के कारण परिवहन विभाग को आठ करोड़ रुपये की चपत लगी है।
ये हैं मुख्य मांगें
- सभी संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए
- 10 हजार नई बसों को शामिल किया जाए
- छोटे आरोपों में बर्खास्त कर्मियों की बहाली
पंजाब रोडवेज की हड़ताल को हरियाणा के कर्मचारियों का समर्थन
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी, पनबस के सभी कच्चे कर्मचारियों की छह सितंबर से शुरू अनिश्चितकाल हड़ताल का समर्थन किया है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष इंद्र सिंह बधाना व महासचिव सरबत सिंह पूनिया ने कहा कि पंजाब सरकार की निजीकरण नीतियों के तहत कच्चे कर्मचारियों का शोषण हो रहा है।
पंजाब में तीनों रोडवेज की मिलाकर बुहत कम बसें हैं। कुल कर्मचारियों मे केवल 10 प्रतिशत कर्मचारी पक्के हैं, शेष 90 प्रतिशत कर्मचारी कच्चे हैं। कच्चे कर्मचारियों को 10 वर्ष की सेवा पूरी होने के बावजूद पक्का नहीं किया जा रहा। उनकी मांग है कि पंजाब सरकार कच्चे कर्मचारियों के नेताओं से बातचीत कर तमाम मांगों को पूरा करे।