कांग्रेस से आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके सुखपाल खैरा की याचिका पर पंजाब पुलिस ने आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर पंजाब सरकार और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद ही जवाब आया है।
खैरा ने आशंका जताई थी कि सरकार उन्हें गलत तरीके से किसी झूठे मामले में फंसाना चाहती है, लिहाजा गिरफ्तारी से एक महीने पहले नोटिस दिया जाना चाहिए।
खैरा की याचिका पर गृह सचिव, डीजीपी, एडीजीपी, आईजी बठिंडा जोन, डीआईजी फिरोजपुर रेंज, एसएसपी और एसपी फाजिल्का को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन कई सुनवाई पर जवाब नहीं आने के बाद पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई थी।
खैरा ने याचिका में कहा था कि पंजाब सरकार फर्जी मामले दर्ज कर उन्हें फंसना चाहती है। लिहाजा, उन्हें किसी भी मामले में पूछताछ करने या उनके खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले एक महीने का नोटिस दिया जाना चाहिए।
खैरा ने कहा था कि वह शुरू से ही अकाली सरकार की कथित गलत नीतियों का विरोध करते रहे हैं। इसीलिए सरकार अब उन्हें राजनीतिक रंजिश के चलते किसी न किसी मामले में फंसाने की फिराक में है।
उन्होंने कहा था कि पिछले साल पांच मार्च को फाजिल्का के जलालाबाद सदर थाने में 11 व्यक्तियों के खिलाफ एनडीपीएस, आर्म्स एक्ट और आईटी एक्ट के तहत एक मामला हुआ था। इस मामले में उनका नाम भी डाल दिया गया है।
इस मामले को लेकर सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। याचिका में आरोप लगाया था कि एसआईटी में सरकार ने अपने चहेतों को लगाया है और सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि इस मामले में उन्हें (खैरा को) फंसाया जाए।
उन्होंने हाईकोर्ट से मांग की थी कि मामले की जांच सीबीआई या अन्य किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए।