नशे के दरिया को खत्म करने का बीड़ा उठाने और नशा तस्करों को गिरफ्तार करने वाली पंजाब पुलिस खुद भी नशा तस्कर बनती जा रही है। पुलिस के कई मुलाजिमों की नशा तस्करी के कारोबार में संलिप्तता पाई गई है। शार्टकट तरीके से पैसे कमाने की लालसा ने पुलिस मुलाजिमों को अपना जमीर तक बेचने को मजबूर कर दिया है।
पहले नशा तस्करी के आरोप में कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल एएसआई स्तर के मुलाजिम गिरफ्तार हो रहे थे, लेकिन बुधवार को जैसे ही एसएचओ अमनदीप सिंह गिल के नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार होने की सूचना मिली तो लुधियाना पुलिस के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
सभी हैरान थे कि चंद रुपयों के लिए थाना प्रभारी खाकी की आड़ में विभाग के साथ इतना बड़ा धोखा कर रहा था। बुधवार दोपहर को एसटीएफ के आईजी आरके जायसवाल ने सारा खुलासा किया। इसके बाद पता चला कि अमनदीप सिंह पैसों की खातिर नशा तस्करों के साथ मिला था।
चंद रुपयों के लिए उसने नशा तस्करों को गिरफ्तार करने की बजाए पैसे लेकर उन्हें छोड़ दिया और उनसे और भी पैसे ऐंठने की फिराक में था। अकेले लुधियाना में एसटीएफ की टीम ने एक साल में दस के करीब पुलिस मुलाजिमों को नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है।
जिनमें पहले सिर्फ कांस्टेबल, हेड कांस्टेल, एएसआई ही शामिल थे, लेकिन बुधवार को एसएचओ का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो गया। नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किए गए मुलाजिमों को अधिकारियों ने या तो नौकरी से बर्खास्त कर दिया या फिर जबरन रिटायर्ड कर दिया।