कट्टरपंथी अमृतपाल के खिलाफ पंजाब पुलिस का एक्शन जारी है। प्रदेशभर में पुलिस का पहरा है। कई जिलों में धारा-144 लागू है। मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवा ठप है। मगर अमृतपाल का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। इस बीच पंजाब पुलिस ने प्रेसवार्ता कर कुछ अहम जानकारी दी है। पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने सोमवार को बताया कि अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई में अब तक 114 लोगों को पकड़ा जा चुका है। इनमें चार लोगों को असम के डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया है। वहीं अमृतपाल के चाचा को डिब्रूगढ़ ले जाया जा रहा है। डिब्रूगढ़ भेजे गए सभी लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य में शांति का माहौल है। स्थिति भी स्थिर है। कानून-व्यवस्था की कोई चुनौती नहीं है। 'वारिस पंजाब दे' के कुछ तत्वों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की गई। इनके खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। वारिस पंजाब दे का प्रमुख अमृतपाल सिंह अभी भी फरार है। पुलिस उसे पकड़ने की हर संभव प्रयास कर रही है। कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। पंजाब पुलिस साफ कह रही है कि गिरफ्तारी अभी बाकी है और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
अब तक 114 तत्वों ने शांति और सद्भाव को भंग करने का प्रयास किया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इनमें 78 को पहले दिन गिरफ्तार किया गया था और 34 लोगों को दूसरे दिन व दो अन्य को रविवार की रात पकड़ा गया है। इनसे 10 हथियार मिले हैं। अब तक सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर हमें आईएसआई के एंगल पर बहुत गहरा संदेह है। हमें विदेशी फंडिंग का भी संदेह है।
हालात को देखकर ऐसा लगता है कि इसमें आईएसआई शामिल है और विदेशी फंडिंग भी गई है। अमृतपाल ने आनंदपुर खालसा फौज (AKF) नाम से एक संगठन बनाने की कोशिश की। उसके घर के दरवाजे पर भी AKF लिखा है। चार लोगों को असम के डिब्रूगढ़ भेज दिया गया। इनमें दलजीत कलसी, बसंत सिंह, गुरमीत सिंह भुखनवाला और भगवंत सिंह का नाम शामिल है। एक अमृतपाल सिंह के चाचा हरजीत सिंह को भी डिब्रूगढ़ ले जाया जा रहा है।