डीजीपी सहोता ने बताया कि जांच के दौरान रणजीत ने खुलासा किया कि उसने सामाजिक कार्यों के बहाने फंड इकट्ठा करने के लिए ‘कौम दे राखे’ नामक ग्रुप बनाया था और इस ग्रुप के जरिए सोशल मीडिया पर वह यूके और अन्य देशों में रह रहे अलग-अलग कट्टरपंथी और दहशतगर्द तत्वों के संपर्क में आया, जिन्होंने सामाजिक कार्य की आड़ में स्लीपर सैल बनाने के लिए मदद की पेशकश की थी। डीजीपी ने आगे बताया कि रणजीत ने आगे खुलासा किया कि हाल ही में उसे हथियारों और विस्फोटकों की एक खेप मुहैया करवाई गई थी और वह सरहदी राज्य में डर का माहौल पैदा करने और अमन-कानून की व्यवस्था को भंग करने के लिए आतंकवादी हमला करने की योजना बना रहा था।
श्री हरमंदिर साहिब के बाहर बुतों में की थी तोड़फोड़
डीजीपी ने बताया कि रणजीत उस ग्रुप का हिस्सा था, जिसने 15 जनवरी, 2020 को श्री हरमंदिर साहिब को जाने वाली विरासती सड़क पर लोक नृत्यों संबंधी प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की थी। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस की तरफ से रणजीत को प्रतिमाओं की तोड़फोड़ के मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह इस समय जमानत पर था।