ईडी के सामने रणइंदर सिंह हुए पेश।
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विदेश में स्थित बैंक खातों में लेन-देन के मामले में गुरुवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर सिंह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक ईडी ने रणइंदर से लेन-देन के सभी दस्तावेज मुहैया कराने को कहा। इस पर रणइंदर ने जवाब दिया कि वे सभी दस्तावेज दे चुके हैं। उनके पास छिपाने को कुछ नहीं है। इसके अलावा उनसे स्विट्जरलैंड और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में लेन-देन व कुछ कंपनियों के बारे में भी सवाल किए गए।
फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन के मामले में पूछताछ के लिए समन मिलने के बाद रणइंदर सिंह गुरुवार सुबह 11:05 बजे जालंधर स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे। रणइंदर के साथ उनके वकील जयवीर शेरगिल व पनसप के चेयरमैन तजिंदर बिट्टू भी थे। वे अपने वकील के साथ ईडी कार्यालय के भीतर गए। ईडी ने उनसे साढ़े पांच घंटे पूछताछ की। पूछताछ के बाद रणइंद्र ने मीडिया से कहा कि वे कानून को मानने वाले भारतीय नागरिक हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे। इस केस में छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
सुरक्षा के थे कड़े बंदोबस्त
मुख्यमंत्री के बेटे होने के नाते जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने ईडी ऑफिस के आसपास सुरक्षा चाक-चौबंद कर रखी थी। डीसीपी गुरमीत सिंह से लेकर एसीपी माडल टाउन व एसीपी केंद्रीय और एसीपी स्थानीय मौजूद रहे।
तीन बार भेजे समन
ईडी ने रणइंदर सिंह को तीन बार समन जारी किए। पहली बार उन्हें 27 अक्तूबर को पेश होने को कहा गया था। लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद फिर छह नवंबर को पेश होने को कहा गया। इस पर उन्होंने कोरोना टेस्ट का हवाला देकर हाजिर होने में असमर्थता जताई। इसके बाद 19 नवंबर को हाजिर होने के लिए समन जारी किया था।
यह है मामला
ईडी रणइंदर सिंह के विदेश में बैंक खातों और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में ट्रस्ट बनाने के मामले की जांच कर रहा है। उन पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन का आरोप है। ईडी ने पहली बार 2016 में उन्हें समन भेजा था लेकिन वे जांच में सहयोग के लिए नहीं पहुंचे थे। तब ईडी दफ्तर में रणइंदर का काफी देर तक इंतजार होता रहा था। अब चार साल बाद दोबारा फाइल खोली गई है। ईडी अब फाइल पर काफी तेजी से कार्य कर रही है।