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पंजाब कांग्रेस में कलह: दिल्ली में हाईकमान की समिति से मिले नवजोत सिद्धू, कहा-मैं अपने स्टैंड पर कायम

Tue, 01 Jun 2021 01:58 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

इससे पहले सोमवार को प्रदेश के 25 मंत्री और विधायकों ने अपनी-अपनी बात खुलकर रखी। नाराज नेताओं ने शिकायत की और कैप्टन खेमे ने चुनाव के मुद्दे पर जोर दिया।
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नवजोत सिद्धू। - फोटो : ANI
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विस्तार
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पंजाब कांग्रेस के अंतर्कलह को खत्म करने के लिए हाईकमान की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति ने दूसरे दिन मंगलवार को भी विधायकों, सांसदों समेत करीब 25 नेताओं से मुलाकात कर उनकी शिकायत दर्ज की। उच्च स्तरीय समिति की ओर से नेताओं को बयानबाजी से परहेज की दी हिदायत का नवजोत सिंह सिद्धू पर कोई फर्क नहीं पड़ा। 

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समिति के सामने अपनी बात रखने के बाद बाहर आए सिद्धू के वही तेवर दिखे जो लंबे समय से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ रहे हैं। सिद्धू ने कहा, मेरा जो स्टैंड था वही रहेगा। उनका कहना है कि योद्धा वही है जो रण के अंदर जूझे। सत्य प्रताड़ित हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। अब बुधवार को मुख्यमंत्री कमेटी के सदस्यों से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उसके बाद समिति कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 

दूसरे दिन समिति से बात करने वाले 25 से अधिक नेताओं में अधिकतर विधायक थे। इन सभी ने अपनी-अपनी बात समिति के समक्ष रखी। नवजोत सिंह सिद्धू भी कमेटी के सदस्यों से रूबरू हुए। मुलाकात के बाद बाहर मीडिया में सिद्धू के तेवर वैसे ही थे जैसे पंजाब में थे। साफ है कि सिद्धू जो करीब दो साल से मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत पर उतारू हैं इस बार आर-पार की लड़ाई और नेतृत्व की ओर से अंतिम फैसला चाहते हैं। 
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तभी उन्होंने कहा, हाईकमान के बुलावे पर मैं पंजाब की आवाज पहुंचाने आया हूं। सिद्धू ने इशारों में कैप्टन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, पंजाब की जीत होगी। पंजाब के लोगों ने लोकतांत्रिक ताकत सरकार को दी है। टैक्स जो सरकार को जाता है वो लौटकर लोगों तक पहुंचे। पंजाब के सच और हक की आवाज हमने बुलंदी से बताई है, पंजाब ही जीतेगा। 

कैप्टन के समर्थक विधायक भी पहुंचे 
कैप्टन के समर्थन में भी विधायकों का गुट सक्रिय है, जिसने सिद्धू के बड़बोलेपन, अनुशासनहीनता और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की शिकायत की है। बेअंत सिंह के परिवार से विधायक गुरकीरत सिंह कोटली ने कहा, सिद्धू को इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पार्टी में नेताओं के बीच कोई टेंशन नहीं है। सबके अलग विचार हो सकते हैं। अपनी बात कहने का लोकतांत्रिक अधिकार है। मीडिया में अलग-अलग बातें पार्टी को कमजोर करती हैं।

कैप्टन के खिलाफ केवल 20 नेता, बाकी सब साथ
पार्टी सूत्रों के पता चला है कि सोमवार और मंगलवार को समिति से मुलाकात करने वाले नेताओं ने शिकायतों का पिटारा खोल दिया है, लेकिन किसी ने भी पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की बात नहीं कही है। समिति अब तक यह मान रही है कि कैप्टन की कार्यप्रणाली के खिलाफ पंजाब में केवल 20 नेता ही हैं, बाकी सभी कैप्टन के साथ हैं। 

वहीं, नाराज नेताओं की नाराजगी की मुख्य वजह बेअदबी और कोटकपूरा फायरिंग मामले में दोषियों को अब तक सजा नहीं दिलाने को लेकर है। समिति कैप्टन के खिलाफ उठ रही आवाज को शांत कर अगले चुनाव के लिए पार्टी की छवि सुधारने का रास्ता तलाश रही है।
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