तभी उन्होंने कहा, हाईकमान के बुलावे पर मैं पंजाब की आवाज पहुंचाने आया हूं। सिद्धू ने इशारों में कैप्टन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, पंजाब की जीत होगी। पंजाब के लोगों ने लोकतांत्रिक ताकत सरकार को दी है। टैक्स जो सरकार को जाता है वो लौटकर लोगों तक पहुंचे। पंजाब के सच और हक की आवाज हमने बुलंदी से बताई है, पंजाब ही जीतेगा।
कैप्टन के समर्थक विधायक भी पहुंचे
कैप्टन के समर्थन में भी विधायकों का गुट सक्रिय है, जिसने सिद्धू के बड़बोलेपन, अनुशासनहीनता और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की शिकायत की है। बेअंत सिंह के परिवार से विधायक गुरकीरत सिंह कोटली ने कहा, सिद्धू को इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पार्टी में नेताओं के बीच कोई टेंशन नहीं है। सबके अलग विचार हो सकते हैं। अपनी बात कहने का लोकतांत्रिक अधिकार है। मीडिया में अलग-अलग बातें पार्टी को कमजोर करती हैं।
कैप्टन के खिलाफ केवल 20 नेता, बाकी सब साथ
पार्टी सूत्रों के पता चला है कि सोमवार और मंगलवार को समिति से मुलाकात करने वाले नेताओं ने शिकायतों का पिटारा खोल दिया है, लेकिन किसी ने भी पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की बात नहीं कही है। समिति अब तक यह मान रही है कि कैप्टन की कार्यप्रणाली के खिलाफ पंजाब में केवल 20 नेता ही हैं, बाकी सभी कैप्टन के साथ हैं।
वहीं, नाराज नेताओं की नाराजगी की मुख्य वजह बेअदबी और कोटकपूरा फायरिंग मामले में दोषियों को अब तक सजा नहीं दिलाने को लेकर है। समिति कैप्टन के खिलाफ उठ रही आवाज को शांत कर अगले चुनाव के लिए पार्टी की छवि सुधारने का रास्ता तलाश रही है।