जीएमएसएच 16 के कोविड के नोडल अधिकारी डॉक्टर हनी साहनी ने बताया कि इस स्थिति में मरीज बिल्कुल सामान्य लोगों की तरह मेंटेन ऑक्सीजन लेवल के साथ खुशहाल जीवन जीता है, इसलिए इसका नाम हैप्पी हाइपोक्सिया रखा गया है।
कोरोना में ज्यादा घातक
कोरोना संक्रमित मरीजों में हैप्पी हाइपोक्सिया का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. साहनी ने बताया कि इसमें संक्रमित मरीज को पहले तो बुखार, खांसी या सांस फूलने की समस्या नहीं होती, लेकिन अचानक ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है, जिसे मेंटेन करना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण किडनी, दिमाग और दिल पर तेजी से असर पड़ता है।
डॉक्टर हनी का कहना है कि बुजुर्गों की तुलना में कम उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा है क्योंकि मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण इन्हें शुरुआती दौर में इसके लक्षणों का पता नहीं चलता और अचानक ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर जाता है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है।
पीजीआई में कोविड-19 के बंधन के चेयरमैन प्रोफेसर जीडी पुरी का कहना है कि ऐसी स्थिति से बचाव के लिए जरूरी है कि होम आइसोलेशन में रखे गए मरीज भी कुछ समय के अंतराल पर लगातार शरीर में ऑक्सीजन के स्तर की जांच करते रहें। इस बात का ध्यान रखें कि ऑक्सीजन का स्तर 95 से 100 के बीच रहना चाहिए।
90 से कम आने पर वह तत्काल डॉक्टर को इसकी सूचना दें, क्योंकि ऑक्सीजन के घटने के साथ ही शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है। इससे फेफड़े प्रभावित होते हैं और खून में ऑक्सीजन की मात्रा सही तरीके से नहीं पहुंच पाती। इसका असर दिल और मस्तिष्क की कोशिकाओं पर भी पड़ता है। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
ऐसे जांचे ऑक्सीजन का स्तर
हैप्पी हाइपोक्सिया की स्थिति से बचाव के लिए शरीर में ऑक्सीजन का स्तर जांचने की प्रक्रिया सीख लें। इसमें एक सांस में 30 तक गिनती गिने। इस दौरान अगर सांस लेने में दिक्कत होती है तो डॉक्टर से संपर्क करें। संक्रमित होने के 6 से 9 दिनों के बीच हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण सामने आते हैं, इसलिए उस दौरान 6 मिनट तक लगातार टहलें और उसके बाद ऑक्सीमीटर से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर जांचे। अगर स्तर 94 से कम आए तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।