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Punjab Mail: 110 साल की हुई पंजाब मेल, 1912 में हुई थी शुरुआत, 64 साल तक भाप इंजन से चली

Wed, 01 Jun 2022 11:42 AM IST
ajay kumar अमित जेतली, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

पंजाब मेल की शुरुआत छह डिब्बों से हुई थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, इसके कोच भी बढ़ते गए। उस समय तीन डिब्बे प्रथम श्रेणी के होते थे। इनमें ब्रिटिश हुकूमत के अधिकारी सफर करते थे। इसके अलावा तीन डिब्बे मेल के होते थे, जिनमें डाक सेवा चलती थी।
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- फोटो : फाइल
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विस्तार
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भारतीय रेलवे की सबसे पुरानी लंबी दूरी की ट्रेनों में से एक पंजाब मेल एक जून 2022 को 110 साल की हो गई है। साल 1912 में ब्रिटिश हुकूमत की ओर से शुरू की गई पंजाब मेल को मुंबई के बल्लार्ड पियर से पाकिस्तान के पेशावर तक चलाया गया था। देश के विभाजन के समय यह ट्रेन अमृतसर से लाहौर के बीच चलाई गई। उस समय पंजाब मेल ने लोगों को अमृतसर और लाहौर पहुंचाने का काम किया था।

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आजादी के बाद इस ट्रेन का गंतव्य भारत-पाक सीमा के नजदीक स्थित फिरोजपुर स्टेशन कर दिया गया। वर्तमान समय में पंजाब मेल मुंबई से फिरोजपुर कैंट के बीच चलती है। यह ट्रेन 110 साल से लगातार सेवाएं दे रही है। इसे कोरोना महामारी के दौरान कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था।

छह डिब्बों से हुई थी शुरुआत, अब हैं 24 कोच
पंजाब मेल की शुरुआत छह डिब्बों से हुई थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, इसके कोच भी बढ़ते गए। उस समय तीन डिब्बे प्रथम श्रेणी के होते थे। इनमें ब्रिटिश हुकूमत के अधिकारी सफर करते थे। इसके अलावा तीन डिब्बे मेल के होते थे, जिनमें डाक सेवा चलती थी। इस ट्रेन को शुरू में केवल अंग्रेजों के लिए चलाया गया था। 1930 में पंजाब मेल में द्वितीय और तिृतीय श्रेणी के डिब्बे भी जोड़ दिए गए। पंजाब मेल को तब से आम यात्रियों के लिए तिृतीय श्रेणी के डिब्बों के साथ चलाया जाने लगा। अब इस ट्रेन में 24 डिब्बे हैं और इनमें करीब 1728 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं।

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आजादी से पहले पंजाब लिमिटेड के नाम से चलती थी पंजाब मेल
पंजाब मेल को आजादी से पहले पंजाब लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। ट्रेन में बल्लार्ड पियर बंदरगाह से समुद्री जहाजों में भारत आने वाले ब्रिटिश अधिकारियों, सिविल सेवकों व उनके परिवारों को गंतव्य तक पहुंचाया जाता था। पंजाब मेल से उनको लाहौर के रास्ते पेशावर लाया जाता था। उस समय यह ट्रेन इटारसी, आगरा, दिल्ली, अमृतसर लाहौर और पेशावर के बीच 2496 किलोमीटर का सफर तय करती थी।

64 साल तक भाप इंजन से चली फिर लगा डीजल इंजन
पंजाब मेल पहले कोयले से चलने वाले भाप इंजन और लकड़ी के कोच के साथ चलती थी। ट्रेन को 1912 से 1976 तक तकरीबन 64 साल तक भाप इंजन से चलाया गया। इसके बाद डीजल इंजन का इस्तेमाल होने लगा। अब ये ट्रेन इलेक्ट्रिक इंजन से चलती है। ट्रेन को बठिंडा तक इलेक्ट्रिक इंजन से चलाया जाता है। बठिंडा से फिरोजपुर लाइन पर विद्युतीकरण न होने के कारण यहां पर डीजल इंजन का इस्तेमाल होता है।
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1945 में बने थे वातानुकूलित डिब्बे, आइस क्यूब तकनीक से होते थे ठंडे
पंजाब मेल के शुरूआती दिनों में वातानुकूलित डिब्बे नहीं थे। वर्ष 1945 में ब्रिटिश हुकूमत ने अपनी सुविधा के अनुसार विशेष किस्म के वातानुकूलित डिब्बे तैयार करवाए। इन डिब्बों को आइस क्यूब तकनीक से ठंडा किया जाने लगा। डिब्बों की छत पर विशेष किस्म के खांचे बने होते थे, जिनमें बर्फ भरी जाती थी। हर बड़े स्टेशन पर बर्फ के बड़े-बड़े आइस क्यूब लाए जाते थे। ट्रेन आने पर आइस क्यूब को डिब्बों की छत में बने खांचों में भर दिया जाता था। इससे डिब्बे के अंदर ठंडक बनी रहती थी। 

देश के छह राज्यों को जोड़ती है पंजाब मेल
पंजाब मेल मौजूदा समय में फिरोजपुर कैंट और छत्रपति शिवाजी टर्मिनल के बीच चलती है। यह ट्रेन देश के छह राज्यों को जोड़ती है। पंजाब मेल फिरोजपुर कैंट, फरीदकोट, कोटकपूरा, गंगसर जैतू, गोनियाना, बठिंडा, मौड़ मंडी, मानसा, बुढ़लाडा, बरेटा, जाखल, टोहाना, नरवाना, जींद, रोहतक, बहादुरगढ़, शकूरबस्ती, दिल्ली किशनगंज, नई दिल्ली, फरीदाबाद, कोसी कलां, मथुरा, राजा की मंडी, आगरा कैंट, धौलपुर, मुरैना, ग्वालियर, दर्बा, दतिया, वीरांगना लक्ष्मीबाई, बबीना, ललितपुर, बीना, गंज बासौदा, विदिशा, भोपाल, रानी कमलापति, होशंगाबाद, इटारसी, बानापुरा, हरदा, खिरकिया, खंडवा, बुरहानपुर, भुसावल, जलगांव, चालीस गांव, मनमाढ़, नासिक रोड, कल्याण, दादर और छत्रपति शिवाजी टर्मिनल तक 1930 किलोमीटर का सफर तय करती है। 

डेक्कन क्वीन ने भी पूरे किए 92 साल
भारतीय रेलवे की डेक्कन क्वीन ट्रेन ने भी 1 जून 2022 को 92 साल पूरे किए हैं। ये ट्रेन मुंबई और पुणे के बीच चलती है। इस ट्रेन की शुरुआत 1930 में हुई थी। डेक्कन क्वीन को पहली डीलक्स ट्रेन भी कहा जाता है।
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