प्रदेश के सरहदी जिलों में ढांचागत विकास के लिए केंद्रीय परियोजनाओं की मांग लंबे समय से की जाती रही है। इसके तहत सीमांत जिलों में रेलवे की विस्तार की मांग और सीमावर्ती जिलों के लिए विशेष पैकेज की मांग पर केंद्रीय बजट लगातार खामोश रहे हैं। इनमें पठानकोट-गुरदासपुर रेलवे लाइन को डबल करने, गुरदासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने, फिरोजपुर से चंडीगढ़ ट्रेन को फाजिल्का से चलाने, फाजिल्का से हरिद्वार के लिए सीधी ट्रेन, जलालाबाद-मुक्तसर नई रेल लाइन, जालंधर व जालंधर कैंट स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फरीदकोट में छह रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग, राजपुरा-मोहाली रेललाइन का बाकी 14 किमी हिस्सा पूरा कर चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेललाइन की मांग अब तक लंबित है।
पंजाब सरकार राज्य में साइकिल, होजरी, लोहा इंडस्ट्री के लिए लंबे समय से कर राहत की मांग करती रही है। प्रदेश सरकार यह मुद्दा इस आधार पर भी केंद्र के समक्ष बार-बार उठाती रही है कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद से पंजाब के उद्योग हिमाचल स्थानांतरित होने लगे हैं। इसके चलते सूबे की सरकार पंजाब को भी विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए।
दिल्ली की सीमाओं पर एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने तीन विवादित कृषि कानून तो वापस ले लिए लेकिन एमएसपी की गारंटी जैसे मुद्दे पर टालमटोल की स्थिति बनी हुई है। पंजाब में छोटी होती जोत, फसलों को न्यूनतम मूल्य में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं होने और कर्ज में डूबे किसानों की कर्ज माफी सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसमें राज्य सरकार अपनी कर्ज माफी योजना में केंद्र से सहयोग की मांग करती रही है। वर्ष 2020-21 के केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने देश के किसानों को लाखों रुपये के कर्ज मुहैया कराने के लिए इस मद में पैसा बढ़ाया लेकिन पूरे बजट में किसानों के पिछले कर्ज माफ करने को लेकर कोई जिक्र नहीं किया।