पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मंत्री अनिल विज को झटका देते हुए एसडीओ के खिलाफ एफआईआर, गिरफ्तारी और सस्पेंशन की उनकी सिफारिश पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कैथल में जिला कष्ट निवारण कमेटी की बैठक के दौरान पब्लिक हेल्थ विभाग के एसडीओ वेदपाल सिंह को उठाकर बाहर फेंकने की बात कही थी। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए वेदपाल ने कहा कि वह अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहा था।
इसी बीच एक दिन गुहला विधायक कुलवंत बाजीगर के भतीजे द्वारा पानी का टैंकर भेजने की डिमांग की गई और लगातार उन पर दबाव बनाया गया। जब उन्होंने इनकार कर दिया तो उसके साथ ऑफिस में मारपीट की गई। याची ने कहा कि जिला कष्ट निवारण कमेटी की बैठक में उनके खिलाफ एक झूठी शिकायत पेश की गई। इस शिकायत को आधार बनाकर विज ने बिना उनका पक्ष सुने उनके खिलाफ एफआईआर की सिफारिश कर दी और गिरफ्तारी तक के आदेश दे दिए।
याची ने बताया कि जिस शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ यह सिफारिश की गई थी उसकी जांच एसई एके पाहवा ने की थी और वह खुद विज के सामने बता रहे थे कि उनकी जांच में एसडीओ पर लगे आरोप गलत मिले हैं। बावजूद इसके उनके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी व सिफारिश कर दी गई। याची ने कहा कि जिला कष्ट निवारण कमेटी को ऐसा कोई अधिकार ही नहीं है कि वह एफआईआर, गिरफ्तारी या सस्पेंशन के आदेश जारी कर सके।
कमेटी के पास अधिकार नहीं
विज ने जूडिशियल व पुलिस पावर इस्तेमाल किया जो उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद याचिका पर हरियाणा सरकार, अनिल विज, कुलवंत बाजीगर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
यह था मामला
एसडीओ पर गुहला-चीका हल्के के गांव ककहेड़ी निवासी ठेकेदार दिग्विजय सिंह ने वर्क ऑर्डर देने के बदले 20 फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगाया था। ग्रीवांस कमेटी के सामने यह शिकायत पहुंची तो अनिल विज की अध्यक्षता में चल रही जिला कष्ट निवारण कमेटी की बैठक के दौरान विज ने एसडीओ के खिलाफ एफआईआर, उसकी गिरफ्तारी और सस्पेंशन की सिफारिश कर दी थी।