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पहलः विदेशों की तर्ज पर देश में भी ये सुविधा देंगी इंश्योरेंस कंपनियां

Tue, 15 Nov 2016 09:38 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जीवन बीमा
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विदेशों की तर्ज पर अब भारत में भी इंश्योरेंस कंपनियां खास सुविधा देने जा रही हैं। हाईकोर्ट ने इस संदर्भ में नियम बनाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब भारत में भी बांझपन और हादसे में हुए गर्भपात के लिए बीमा कंपनियों को मुआवजा देना होगा। मोनिका डी. मेहताब की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने आई.आर.डी.ए. को इस संदर्भ में नियम बनाने के निर्देश दिए।
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कोर्ट में केंद्र सरकार ने इसे अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी जिसके बाद अब इन नियमों के बनने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही आईआरडीए ने हाईकोर्ट को बताया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने बांझपन को कवर करने वाली दो पॉलिसी लॉंच की है और इस दिशा में अन्य कंपनियों को शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने इसपर सुनवाई 16 दिसंबर तक टाल दी। मामले में याचिका दाखिल करते हुए मोनिका डी. मेहताब ने कहा था कि अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य देशों में बांझपन या हादसे से हुआ गर्भपात बीमा कवर में आता है। बांझपन की स्थिति में या गर्भपात की स्थिति में बीमा कंपनियां पीड़ित को क्लेम की राशि मुहैया करवाती है। बांझपन की स्थिति में यह क्लेम अच्छे से अच्छा इलाज करवाने के लिए मुहैया करवाया जाता है।
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याची ने अपनी याचिका में ये दलील दी

court shimla
याची ने कहा कि जब विदेशों में ऐसा होता है तो भारत में भी इसके लिए प्रावधान होना चाहिए। भारत में अभी तक इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है और  यह इंश्योरेंस के दायरे में नहीं आते हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में चार सरकारी बीमा कंपनियों, केंद्र सरकार और आईआरडीए (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीका) को पार्टी बनाया था।

वीरवार को इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से कहा गया कि आई.आर.डी.ए. ही इंश्योरेंस की रेगुलेटरी अथॉरिटी है और ऐसे में उन्हें ऐसे रेगुलेशन बनाने के निर्देश दिए जाएं जिससे बांझपन और गर्भपात को बीमा कवर क्षेत्र में शामिल किया जाए। रेगुलेशन बनने के बाद ही सरकारी और प्राईवेट बीमा कंपनियां इस कवर का लाभ दे पाएंगी।

केंद्र सरकार ने कहा कि यदि आईआरडीए ऐसा रेगुलेशन तैयार करे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और इसके साथ ही केंद्र सरकार ने इसके लिए कोर्ट में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने इस पर आईआरडीए को इन प्रावधानों को अपनाने और दिशा में आगे बढ़कर काम करने के निर्देश दिए  हैं।
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सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी योजना

 इंश्योरेंस कंपनी - फोटो : demo
आईआरडीए द्वारा दी गई मंजूरी और प्रावधानों को अंतिम रूप दिए जाने के साथ ही बांझपन और गर्भपात की स्थिति में बीमा कवर के लाभ का रास्ता साफ हो जाएगा। हाईकोर्ट के इन आदेशों का प्रभाव देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर होगा। सबसे अधिक लाभ उन दंपत्तियों को मिलेगा जो संतान सुख के लिए अपनी जीवन भर की जोड़ी हुई पूंजी को ईलाज में खर्च करने को मजबूर हैं।

हर बीमा कंपनी के लिए अनिवार्य हो यह बीमा
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि बीमा के कवर का दायरा बढ़ाने के साथ ही बांझपन का बीमा हर कंपनी के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस बीमा के तहत इलाज से लेकर अन्य लाभ दिए जाने का प्रावधान होना चाहिए। साथ ही अपील यह भी है कि आईआरडीए इसके लिए विस्तृत प्रावधान करें ताकि कंपनियां इसके लिए बाध्य हो जाएं कि वे इस बीमा का लाभ दें।

 
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