Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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विदेश की तर्ज पर अब भारत में भी बांझपन और हादसे में गर्भपात के लिए बीमा कंपनियों को मुआवजा देना होगा। मोनिका डी. मेहताब की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने आईआरडीए को इस संदर्भ में नियम बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट में केंद्र सरकार ने इसे अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी, जिसके बाद अब इन नियमों के बनने का रास्ता साफ हो गया है।
आईआरडीए ने हाईकोर्ट को बताया कि नेशनल इंश्योरेंस ने बांझपन को कवर करने वाली दो पॉलिसी लांच की है और इस दिशा में अन्य कंपनियों को शामिल करने के लिए काम किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई 16 दिसंबर तक स्थगित कर दी।
मोनिका डी. मेहताब ने अपनी याचिका में कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य देशों में बांझपन या हादसे से हुआ गर्भपात बीमा कवर में आता है। वहां बांझपन या गर्भपात की स्थिति में बीमा कंपनियां पीड़ित को क्लेम की राशि मुहैया करवाती है। बांझपन की स्थिति में यह क्लेम अच्छे से अच्छा इलाज करवाने के लिए मुहैया करवाया जाता है। याची ने कहा कि जब विदेशों में ऐसा होता है तो भारत में भी इसके लिए प्रावधान होना चाहिए।
भारत में अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और ये इंश्योरेंस के दायरे में भी नहीं आते हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में चार सरकारी बीमा कंपनियों, केंद्र सरकार और आईआरडीए (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) को पार्टी बनाया था। वीरवार को इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से कहा गया कि आईआरडीए ही इंश्योरेंस की रेगुलेटरी अथॉरिटी है और ऐसे में उन्हें ऐसे रेगुलेशन बनाने के निर्देश दिए जाएं, जिससे बांझपन और गर्भपात को बीमा कवर क्षेत्र में शामिल किया जाए। रेगुलेशन बनने के बाद ही सरकारी और प्राइवेट बीमा कंपनियां इस कवर का लाभ दे पाएंगी।