चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड आरक्षित करने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दो वार्डों की जनसंख्या में 47 हजार के अंतर पर यूटी प्रशासन से जवाब तलब कर लिया है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) महासचिव शिव कुमार व आम आदमी पार्टी (आप) नेता शकील मोहम्मद ने चंडीगढ़ निगम चुनाव के लिए वार्ड आरक्षित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
याची ने बताया कि 2011 से 2021 के बीच कई कॉलोनियों को तोड़ा व हटाया गया है। कई कॉलोनियां ऐसी हैं जो अस्तित्व में ही नहीं है। वार्ड आरक्षित करते हुए ऐसी कालोनियों की जनसंख्या को आधार बनाया गया है। याची ने इस संबंध में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी और पूछा कि एरिया के अनुसार वार्ड की जनसंख्या की जानकारी दी जाए। जवाब में एरिया के अनुसार जानकारी न देकर वार्ड के अनुसार जानकारी दी गई।
वार्ड आरक्षित करने के चुनाव आयोग के फैसले को खारिज करने की मांग
याची ने कहा कि 2011 की जनसंख्या को आधार बनाकर कैसे वार्ड आरक्षित किए जा सकते हैं। याची ने कहा कि वार्ड 7, 16, 19, 24, 26, 28 व 31 को इसी प्रकार आरक्षित रखने का फैसला लिया गया है। हाईकोर्ट से अपील की गई कि वार्ड आरक्षित करने के चुनाव आयोग के 19 अक्तूबर के फैसले को खारिज किया जाए। साथ ही आरक्षण के लिए जनगणना को ध्यान में रखते हुए जो कॉलोनी मौजूद नहीं हैं, उनकी जनसंख्या को हटाकर देखा जाए कि वार्ड आरक्षित होना है या नहीं।
मंगलवार को करीब आधे घंटे चली सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने सवाल उठाए कि वार्ड नंबर 15 में केवल 3400 मतदाता हैं जबकि वार्ड 32 में इनकी संख्या 50 हजार से अधिक है। याची ने कहा कि वर्तमान की जनसंख्या के आधार पर ही वार्ड आरक्षित होना चाहिए। हाईकोर्ट ने आंकड़ों पर हैरानी जताते हुए अब यूटी प्रशासन से इस संदर्भ में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।