नशा तस्करी के दोषी की सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि थोड़े से मुनाफे के लिए युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वाले रहम के हकदार नहीं है। अगर ऐसे लोगों से सख्ती से नहीं निपटा गया तो यह कारोबार बढ़ता ही जाएगा।
एफआईआर के अनुसार याचिकाकर्ता को पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था। हिमाचल के बिलासपुर से आनंदपुर साहिब याची स्कूटर से जा रहा था और पुलिस ने उसके पास से एक किलो अफीम जब्त की थी। रूप नगर की ट्रायल कोर्ट ने याची को दोषी मानकर तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए याची ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली थी।
याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि इस प्रकार बढ़ते मामले खौफनाक संकेत दे रहे हैं। लोग थोड़े से मुनाफे के लिए युवाओं का भविष्य बर्बाद करते हुए उन्हें गलत दिशा में भी लेकर जा रहे हैं। ऐसे लोग नशे को समाज में फैला कर समाज का ताना बाना बर्बाद करने में जुटे हैं। अगर इन लोगों से सख्ती से नहीं निपटा गया तो यह कारोबार बढ़ता ही जाएगा। नशे के कारोबार में लगे लोग रहम के पात्र नहीं हैं। ऐसे लोगों पर सख्ती से कार्रवाई बेहद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो राज्य में बढ़ता नशे का कारोबार तेजी से बढ़ता जाएगा और इस पर लगाम लगाना मुश्किल हो जाएगा। नशे के सौदागर युवाओं को रोमांच के लिए जाल में फंसा लेते हैं और उन्हें गलत दिशा में ले जाने में कामयाब हो जाते हैं, जो समाज के लिए बेहद घातक साबित हो रहा है।