पंजाब में बीते एक माह में लंपी त्वचा रोग (एलएसडी) के कारण 400 से अधिक गायों की जानें जा चुकी हैं। सूबे में चार जुलाई को इस रोग का पहला मामला सामने आया था। पशु पालन विभाग के अनुसार राज्य में लगभग 20 हजार गायें इससे संक्रमित हो चुकी हैं। पशु पालन विभाग ने अपने पूरे अमले को इस रोग से पशुओं के बचाव के साथ पशुपालकों को जागरूक करने के लिए तैनात कर दिया है और अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
इधर राज्य सरकार ने भी इस रोग से निपटने के पुख्ता प्रबंध करने के लिए 76 लाख रुपये की राशि जारी कर दी है। इस राशि में से 5-5 लाख रुपये सीमावर्ती जिलों और 3-3 लाख रुपये अन्य जिलों के लिए आवंटित किए गए हैं, ताकि पीड़ित पशुओं के लिए दवा का तुरंत प्रबंध किया जा सके। राज्य सरकार ने इस रोग से निपटने के लिए ‘फील्ड वेटरिनरी’ स्टाफ को अभियान तेज करने का निर्देश पहले ही दे दिए हैं। सरकार ने यह भी आदेश जारी किए हैं कि सर्वाधिक प्रभावित जिलों में तत्काल प्रभाव से पशु चिकित्सा अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाए। पशुपालन विभाग के जिला उप-निदेशकों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि यह रोग एक माह पहले गुजरात में पशुओं में दिखाई दिया था। उस दौरान लाइलाज होने के कारण गुजरात में 12 हजार से अधिक पशुओं की मौत हो गई थी। इसके बाद यह रोग राजस्थान की तरफ बढ़ा और इस राज्य में भी 3 हजार पशुओं की जान गई। अब यह रोग पंजाब के पशुओं में आने से पशु पालकों और सरकार की चिंता बढ़ गई है। इस रोग का ज्यादा असर सीमावर्ती जिलों के पशुओं में देखा गया है।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक राम पाल मित्तल के मुताबिक इस समय राज्य में बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, जालंधर, मोगा और मुक्तसर जिले लंपी त्वचा रोग से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं। विभाग ने पशुओं को वायरल संक्रमण से बचाने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। अधिसूचना के मुताबिक लंपी से संक्रमित पशु से अन्य पशुओं में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए उसे अन्य पशुओं से अलग किया जाना चाहिए।
अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे जानवरों की आवाजाही को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। लंपी से प्रभावित जानवरों को हरा चारा और तरल आहार दिया जाना चाहिए। पशुपालकों को स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए और पशुओं के बाड़े में कीटाणुनाशक का छिड़काव करना चाहिए। विभाग ने अब तक इस रोग के करीब 20000 मामले दर्ज किए हैं, जबकि 424 पशुओं की मौत के आंकड़े सामने आ चुके हैं। मित्तल के अनुसार संक्रमित गायों की ज्यादातर सूचना गोशालाओं और डेयरी फार्मों से मिली है।