हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए टिप्पणी की कि पति पर नशे के व्यापार का आरोप है तो पत्नी को आरोपी कैसे बनाया जा सकता है। फतेहगढ़ साहिब की एक महिला को एनडीपीएस के मामले में केवल इसलिए आरोपी बना दिया गया क्योंकि उसके पति पर केस दर्ज था और जिस घर में सामान मिला वह महिला के नाम था। ट्रायल कोर्ट ने पत्नी को आरोप मुक्त कर दिया था जिसे पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी की पत्नी होने के नाते किसी को पुलिस कैसे आरोपी बना सकती है। फतेहगढ़ साहिब निवासी रीत सिद्धू के पति पर से 6 किलो नशीला पदार्थ बरामद होने की बात कही गई थी। इस दौरान रीत का पति फरार हो गया और उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। इस दौरान पुलिस ने चालान दाखिल करते हुए रीत सिद्धू को भी आरोपी बना दिया था।
ट्रायल कोर्ट ने रीत सिद्धू के खिलाफ चार्जशीट न स्वीकार कर बाकी आरोपियों के खिलाफ इसे स्वीकार कर लिया था। इसके खिलाफ पंजाब सरकार हाईकोर्ट में अपील करने पहुंच गई। जस्टिस एबी चौधरी ने पंजाब सरकार की इस अपील पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या रीत के खिलाफ उनके पास कोई ठोस सबूत है, जिसके जवाब में पंजाब सरकार ने अपनी दलीलें रखीं।
इन दलीलों को नाकाफी बताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई खामी नहीं है। इस मामले में पति को भगोड़ा घोषित किया गया, उस पर नशे के व्यापार का आरोप है उसको आरोपी बनाना सही है लेकिन जिस घर में वह रहता था वह उसकी पत्नी के नाम था और वहां नशा पाया गया यह रीत को आरोपी बनाने के लिए काफी नहीं है।