पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि वाहन हादसे के मामलों में मृतक के आश्रतों के लिए मुआवजा तय करते हुए उसमें से बीमा, पेंशन ग्रेच्युटी व अन्य की कटौती नहीं की जा सकती। हालांकि जब मुआवजे के लिए आय की गणना की जाए तो इसे आय के रूप में शामिल करना जरूरी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने एक पूर्व फौजी के आश्रितों की मुआवजा राशि को 21 लाख से बढ़ाकर 37 लाख कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए हिसार निवासी पुष्पा देवी ने बताया कि उनके पति पहले फौज में थे और बाद में उन्होंने एक निजी बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली थी। अगस्त 2015 में उसके पति को जीप ने टक्कर मार दी थी जिसके चलते उनकी मौत हो गई। याची ने बताया कि उनके पति उस समय 52 साल का थे और 21 हजार रुपये सिक्योरिटी गार्ड के रूप में वेतन पाते थे। याची पूर्व फौजी थे और ऐसे में उसे पेंशन के रूप में 15 हजार रुपये महीना मिलता था। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल हिसार ने मुआवजा तय करते हुए याची के पति की आय में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर मिलने वाले वेतन को ही जोड़ा, पेंशन को नहीं।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि याची के पति को मिल रही पेंशन अब परिवार को मिल रही है, ऐसे में यह नुक्सान नहीं है। ऐसे में मुआवजे के रूप में याची को केवल 21 लाख रुपये जारी करने का आदेश दिया गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पेंशन, बीमा, ग्रेच्युटी आदि परिवार को कर्मचारी की सेवाओं के कारण मिल रही है, न की वाहन हादसे में मौत के कारण। ऐसे में हाईकोर्ट ने पेंशन की राशि को भी याची के पति की आय में जोड़ते हुए मुआवजे की राशि को 21 लाख से बढ़ाकर 37 लाख कर दिया।