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Highcourt: फंगल इंफेक्शन के चलते बायोमेट्रिक न देने पर HTET परिणाम रद्द, हरियाणा बोर्ड पर 1 लाख जुर्माना

Sat, 17 Aug 2024 08:37 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

फतेहाबाद के याची ने हाईकोर्ट को बताया था कि 2019 में आयोजित एचटेट परीक्षा वाले दिन उसकी उंगलियों और अंगूठे में फंगल इंफेक्शन था। इसी कारण वह बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट नहीं दे सका। इसी के चलते उसका परीक्षा परिणाम रद्द कर दिया गया था। 
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उंगली पर फंगल इंफेक्शन के चलते बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज न करवा पाने वाले आवेदक का एचटेट (हरियाणा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) परिणाम रद्द करने के फैसले को असंवेदनशील दृष्टिकोण मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा शिक्षा बोर्ड पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 

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कोर्ट ने कहा कि याची के करियर के पांच साल बर्बाद हो चुके हैं, ऐसे में अब परिणाम जारी करने में बिल्कुल देरी न हो। फतेहाबाद निवासी हरजीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 2019 में आयोजित एचटेट में याचिकाकर्ता की पहचान और उपस्थिति सत्यापन करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने 16 नवम्बर 2019 को परीक्षा दी थी और उसका परिणाम रद्द कर दिया गया है। परीक्षा वाले दिन याची की उंगलियों और अंगूठे में एलर्जी/फंगल इंफेक्शन था जिसके चलते बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट नहीं लिए जा सके। बाद में बायोमेट्रिक मिलान न होने से उसका परीक्षा परिणाम को रद्द कर दिया गया था। 

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एलर्जी के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं किए जा सके, लेकिन याची के अनुरोध पर सभी पहचान प्रमाण और दस्तावेज दिखाने के बाद पांच व्यक्तियों की कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने फंगल/एलर्जी इंफेक्शन के चलते उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी और कागज पर उसके मैनुअल फिंगर प्रिंट ले लिए। यह नहीं कहा जा सकता कि केवल केंद्र प्रभारी की गलती के कारण याचिकाकर्ता को परीक्षा देने की अनुमति दी गई, बल्कि यह वहां मौजूद चार-पांच अधिकारियों सचेत निर्णय था। 
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याचिकाकर्ता के परिणाम को रद्द करने का कारण बायोमेट्रिक में विफलता था, जबकि प्रतिवादी-बोर्ड का यह स्वीकार किया हुआ मामला है कि याचिकाकर्ता के हाथों में उपरोक्त एलर्जी/फंगल संक्रमण था और इसका कोई खंडन नहीं है। याचिकाकर्ता ने 16 नवम्बर 2019 को परीक्षा दी थी और परिणाम रद्द होने के कारण उसका करियर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोर्ट ने कहा कि बोर्ड का दृष्टिकोण बिल्कुल असंवेदनशील है और अत्यधिक निंदनीय।

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