इस पर हाईकोर्ट ने दलाल से पूछा है कि वह बताएं कि वर्तमान परिस्थितियों को किस प्रकार के आदेश जारी किए जा सकते हैं। 23 अक्तूबर को अब दलाल को इस बारे में उनका पक्ष रखना होगा और उनका पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट इस याचिका पर फैसला सुनाएगा। हाईकोर्ट में यह मामला पिछले 16 साल से विचाराधीन हैं लेकिन मामला जहां से चला था अभी तक वही खड़ा हैं।
हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एके सीकरी अप्रैल 2013 में इस मामले में सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित भी रखा था। लेकिन उनके सुप्रीम कोर्ट में चले जाने के कारण वो अपना फैसला नही सुना सके और इस केस पर एक साल बाद अब दोबारा सुनवाई शुरू हुई थी। इस मामले में हाईकोर्ट के कई जजों की बैंच कुछ चयनित उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिका देख चुके हैं। कई बार जांच में पाया गया कि इतिहास व भूगोल के कुछ पेपर में खामियां थी। कुछ उम्मीदवारों ने मैप नही भरा या गलत भरा तो कुछ का मैप ही गायब था, फिर भी उनको अंक दिए गए।
यह था मामला
कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल याचिका दाखिल करते हुए कहा था एचसीएस भर्ती में चहेतों को नौकरी देने के लिए उन्हें लिखित परीक्षा में कम अंक होने के बावजूद इंटरव्यू में ज्यादा अंक देकर चयन कर लिया गया। चौटाला सरकार ने अपने नजदीकी व चहेते लोगों को नियुक्ति देने के लिए इस भर्ती में धांधली की और योग्य लोगों को अनदेखा कर अयोग्य लोगों को नियुक्ति दे दी। इस मामले में विजिलेंस से लेकर कई स्तर पर जजों ने भी जांच में पाया था कि भर्ती में धांधली हुई हैं।