सरहद पार से हथियारों की तस्करी करने वालों को अपने घर में शरण देने की आरोपी महिला को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) प्रथम दृष्टया यह साबित नहीं कर पाई कि महिला आरोपियों के संपर्क में थी और उसे अपराध के बारे में जानकारी भी थी। हाईकोर्ट ने मोहाली की विशेष अदालत की ओर से जमानत याचिका रद्द करने का फैसला खारिज कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी बलजीत कौर ने बताया कि उसके खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम में मामला दर्ज किया गया था। याची पर आरोप है कि वह सीमा पार से हथियारों की तस्करी करने वालों के संपर्क में थी और याची ने उन्हें शरण दी थी। याची ने कहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसके बेटे के साथ एक दिन कुछ लोग आए थे जिनके बारे में याची नहीं जानती थी। इसके बावजूद इस मामले में एनआईए ने उसे आरोपी बनाया है।
एनआईए के अनुसार याची को आरोपियों से एक सोने की अंगूठी मिली थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची व आरोपियों के बीच फोन कॉल का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। याची के पास जो अंगूठी मिली है वह कहां से खरीदी गई है इसका कोई ब्योरा मौजूद नहीं है। भारत में किसी भी महिला के पास सोने का आभूषण होना कोई अलग बात नहीं है। ऐसे में एनआईए फिलहाल याची को अपराध से जोड़ने में प्रथम दृष्टया नाकाम रही। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत दे दी।