कानूनी नैतिकता के सिद्धांतों को सुव्यवस्थित करने के लिए हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव
कानूनी नैतिकता के सिद्धांतों को सुव्यवस्थित करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से सुझाव मांगे हैं। हाईकोर्ट ने उन बिंदुओं पर सलाह मांगी है जहां वकील अपने कानूनी कर्तव्य को अनदेखा कर देते हैं।
एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सामने आया था कि याचिकाकर्ता ने पूर्व में दाखिल याचिका के बारे में कोर्ट को जानकारी नहीं दी थी तथा वर्तमान याचिका में भी तथ्यों को छुपाया था। कोर्ट ने जब याची के वकील से इसकी वजह पूछी तो इसके बारे में वकील जानकारी नहीं दे सका। हाईकोर्ट ने उस याचिका को वापस लेने की छूट के साथ उसे खारिज कर दिया। भविष्य में इस प्रकार की कोई घटना न हो इसके लिए हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस बारे में बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से 4 मई तक सुझाव मांग लिए हैं।
अनुपम गुप्ता कोर्ट मित्र होंगे
इस मामले में कोर्ट का सहयोग करने के लिए हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता को कोर्ट मित्र के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला कानूनी नैतिकता से जुड़ा हुआ है और इस मामले में कानूनी नैतिकता की उपेक्षा की गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि वकील का दायित्व केवल अपने मुवक्किल के प्रति नहीं बल्कि पूरे समाज के प्रति होता है। ऐसे में कानूनी नैतिकता के सिद्धांत जरूरी है। ऐसा इसलिए भी जरूरी है ताकि न्याय पर विश्वास बना रहे।